“अंधकार को दूर करने के लिए अँधेरे से लड़ने की कोई जरुरत नहीं होती; बस रोशनी लानी होती है और जब लड़ाई नहीं होगी तो मन में कोई अवसाद नहीं होगा. साथ ही जब कोई लड़ाई ही नहीं रहेगी तो किसी के पक्ष में खड़े होने, विपक्ष में रहने या मूक साक्षी बने रहने से क्या फर्क पड़ता है. रोशनी लाने हेतु जिस दीप को जलाया जाता है, वह दीप जलता रहता है....”
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Sanjay Choubey,
9 November