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  • #1
    Ian Fleming
    “Once is happenstance. Twice is coincidence. Three times is enemy action”
    Ian Fleming, Goldfinger

  • #2
    Ian Fleming
    “I am a poet in deeds--not often in words.”
    Ian Fleming, Goldfinger

  • #3
    Harishankar Parsai
    “आत्मविश्वास धन का होता है, विद्या का भी और बल का भी, पर सबसे बड़ा आत्मविश्वास नासमझी का होता है ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #4
    Harishankar Parsai
    “मैंने कोई विज्ञापन ऐसा नहीं देखा जिसमें पुरुष स्त्री से कह रहा हो कि यह साड़ी या यह स्नो खरीद लो । अपनी चीज वह खुद पसन्द करती है, मगर पुरुष की सिगरेट से लेकर टायर तक में दखल देती”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #5
    Harishankar Parsai
    “मैं ईसा की तरह सूली पर से यह नहीं कहता - पिता, उन्हें क्षमा कर। वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं। मैं कहता - पिता, इन्हें हरगिज क्षमा न करना। ये कम्बख्त जानते हैं कि ये क्या कर रहे हैं।”
    Harishankar Parsai, विकलांग श्रद्धा का दौर

  • #6
    Harishankar Parsai
    “-स्वामीजी, पश्चिम के देश गौ की पूजा नही करते, फिर भी समृद्ध है?
    - उनका तो भगवान दूसरा है बच्चा! उन्हें कोई दोष नही लगता।
    - यानी भगवान रखना भी एक झंझट ही है। वह हर बात दंड देने लगता है।
    - तर्क ठीक है, बच्चा, पर भावना गलत है।
    - स्वामीजी, जहॉ तक मै जानता हूँ, जनता के मनमे इस समय गोरक्षा नही है, महगाई और अर्थिक शोषण है। जनता महँगाई के खिलाफ आंदोलन करती है। वह वेतन और महगाईभत्ता बढ़वाने के लिए हड़ताल करती है। जनता आर्थिक न्याय के लिए लड़ रही है। और इधर आप गोरक्षा आंदोलन लेकर बेठ गए है। इसमें तुक क्या है?
    - बच्चा, इसमें तुक है। देखो जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलज़ा देना चाहिए, नही तो वः खतरनाक हो जाती है। जनता कहती है- हमारी माँग है महगाई बन्ध हो, मुनाफाखोरी बन्द हो, वेतन।बढ़े, शोषण बंद हो, तब हम उससे कहते है की नही तुम्हारी बुनियादी मांग गोरक्षा है। बच्चा, आर्थिक क्राँति की तरफ बढ़ती जनता को हम रास्ते में ही गाय के खूंटे से बाँध देते है। यह आंदोलन जनता को उलझाये रखने के लिए है।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #7
    Harishankar Parsai
    “मेरी सुलझी हुई दृष्टि का यही रहस्य है। दूसरो को सुख का रास्ता बताने के लिए में प्रश्न और उत्तर बता देता हूं।

    तुम किस देश के निवासी हो?
    भारत के।
    तुम किस जाति के हो?
    आर्य।
    विश्व में सबसे प्राचीन जाति कौन?
    आर्य।
    और सबसे श्रेष्ठ?
    आर्य।
    क्या तुमने खून की परीक्षा कराइ है?
    हां, उसमे सौ प्रतिशत आर्य सेल है।
    देवता भगवान को क्या प्रार्थना करते है?
    की हमे पुण्यभूमि भारत में जन्म दो।
    बाकी भूमि कैसी है?
    पापभूमि है।
    देवता कही और जन्म नही लेते?
    कतई नहीं। वे मुझे बताकर जन्म लेते है।
    क्या देवताओ के पास राजनितिक नक्शा है?
    हां, देवताओंके पास 'ऑक्सफर्ड वर्ल्ड एटलास' है।
    क्या उन्हें पाकिस्तान बनने की खबर है?
    उन्हें सब मालूम है। वे 'बाउंड्री कमीशन' की रेखा को मानते है।
    ज्ञान विज्ञान किसके पास है?
    सिर्फ आर्यो के पास।
    यानी तुम्हारे पास?
    नही हमारे पूर्वज आर्यो के पास।
    उसके बाहर कही ज्ञान विज्ञान नही है?
    कहीँ नहीँ।
    इन हजारो सालो में मनुष्य जाति ने कोई उपलब्धि की?
    कोई नहीँ। सारी उपलब्धि हमारे यहाँ हो चुकी थी।
    क्या अब हमे कुछ शीखने की जरूरत है?
    कतई नहीँ। हमारे पूर्वज तो विश्व के गुरू थे।
    संसार में महान कौन?
    हम, हम, हम।
    मेरा ह्रदय गदगद होने लगा। अश्रुपात होने लगा। मैंने आँखे बंद कर ली। मुख से”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #8
    Harishankar Parsai
    “-स्वामीजी, दुसरे देशो में लोग गाय की पूजा नही करते, पर उसे अच्छी तरह रखते है और वह बहुत खूब दूध देती है।
    - बच्चा , दूसरे देशो की बात छोडो। हम उनसे बहुत ऊँचे है। देवता इसीलिय सिर्फ हमारे यहाँ अवतार लेते है। दुसरे देशो में गाय दूध के उपयोग के लिए होती है, हमारे यहाँ दँगा करने, आंदोलन करने के लिए होती है। हमारी गाय और गायो से भिन्न है।
    - स्वामीजी, और सब समस्याएं छोड़कर आप लोग इसी एक काम में क्यों लग गए है?
    - इसी से सब हो जाएगा बच्चा! अगर गोरक्षा का क़ानून बन जाए तो यह देश अपने आप समृध्द हो जाएगा। फ़िर बादल समय पर पानी बरसाएंगे, भूमि खूब अन्न देगी और कारखाने बिना चले भी उत्पादन करेंगे। धर्म का प्रताप तुम नही जानते। अभी जो देश की दुर्दशा है, वह गौ के अनादर के कारण ही है।
    - एक और बात बताइये। कई राज्यो में गौ रक्षा के लिए क़ानून है बाकी में समाप्त हो जाएगा। आगे आप किस बात पर आंदोलन करेंगे?
    - अरे बच्चा, आंदोलन के लिए बहुत विषय है। सिंह दुर्गा का वाहन है। उसे सर्कस वाले पिंजरे में बंद करके रखते है और उससे खेल कराते है। यह अधर्म है। सब सर्कसो के खिलाफ आंदोलन करके, देश के सारे सर्कस बन्द करवा देंगे। फिर भगवान का एक अवतार मत्स्यावतर भी है। मछली भगवान का प्रतीक है। हम मछुओ के खोलाफ आंदोलन छेड़ देंगे। सरकार का मत्स्यपालन विभाग बन्ध करवा देंगे।
    - स्वामीजी उल्लू लक्ष्मी जी का वाहन है। उसके लिए भी तो कुछ करना चाहिये।
    - यह सब उसीके लिए तो कर रहे है, बच्चा! इस देश में उल्लू को कोई कष्ट नही है। वह मजे में है।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #9
    Harishankar Parsai
    “भरत ने कहा - स्मगलिंग तो अनैतिक है। पर स्मगल किए हुए सामान से अपना या अपने भाई-भतीजे का फायदा होता है, तो यह काम नैतिक हो जाता है। जाओ हनुमान, ले जाओ दवा।

    मुंशी से कहा - रजिस्टर का पन्ना फाड़ दो।”
    Harishankar Parsai, विकलांग श्रद्धा का दौर

  • #10
    Harishankar Parsai
    “उपदेश—अगर चाहते हो कि कोई तुम्हें हमेशा याद रखे, तो उसके दिल में प्यार पैदा करने का झंझट न उठाओ । उसका कोई स्केंडल मुट्ठी में रखो । वह सपने में भी प्रेमिका के बाद तुम्हारा चेहरा देखेगा ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #11
    Harishankar Parsai
    “विवाह का दृश्य बड़ा दारुण होता है। विदा के वक्त औरतों के साथ मिलकर रोने को जी करता है। लड़की के बिछुड़ने के कारण नहीं, उसके बाप की हालत देखकर लगता है, इस कौम की आधी ताकत लड़कियों की शादी करने में जा रही है। पाव ताकत छिपाने में जा रही है–शराब पीकर छिपाने में, प्रेम करके छिपाने में, घूस लेकर छिपाने में–बची हुई पाव ताकत से देश का निर्माण हो रहा है–तो जितना हो रहा है, बहुत हो रहा है। आखिर एक चौथाई ताकत से कितना होगा?”
    Harishankar Parsai, अपनी अपनी बीमारी

  • #12
    Harishankar Parsai
    “हमारे देश में सबसे आसान काम आदर्शवाद बघारना है और फिर घटिया से घटिया उपयोगितावादी की तरह व्यवहार करना है। कई सदियों से हमारे देश के आदमी की प्रवृत्ति बनाई गई है अपने को आदर्शवादी घोषित करने की, त्यागी घोषित करने की। पैसा जोड़ना त्याग की घोषणा के साथ ही शुरू होता है।”
    Harishankar Parsai, आवारा भीड़ के खतरे [Awara Bheed Ke Khatare]
    tags: satire

  • #13
    Harishankar Parsai
    “हीनता के रोग में किसी के अहित का इंजेक्शन बड़ा कारगर होता है।”
    Harishankar Parsai, विकलांग श्रद्धा का दौर

  • #14
    Harishankar Parsai
    “मैं इतना बड़ा लेखक हूँ । यहाँ तीन गर्ल्स-कालेज हैं । उनकी सारी लड़कियों को मेरे इर्द-गिर्द होना चाहिए कि नहीं ? मगर कोई नहीं आती ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #15
    Harishankar Parsai
    “सफेदी की आड़ में हम बूढ़े वह सब कर सकते हैं, जिसे करने की तुम जवानों की भी हिम्मत नहीं होती ।”
    Harishankar Parsai

  • #16
    Harishankar Parsai
    “आम भारतीय जो गरीबी में, गरीबी की रेखा पर, गरीबी की रेखा के नीचे हैं, वह इसलिए जी रहा है कि उसे विभिन्न रंगों की सरकारों के वादों पर भरोसा नहीं है। भरोसा हो जाये तो वह खुशी से मर जाये। यह आदमी अविश्वास, निराशा और साथ ही जिजीविषा खाकर जीता है।”
    Harishankar Parsai, आवारा भीड़ के खतरे [Awara Bheed Ke Khatare]
    tags: satire

  • #17
    Harishankar Parsai
    “उसे लगभग ढाई सौ रुपए माहवार मिलते थे । ऊपरी आमदनी बहुत कम या नहीं होती होगी, क्योंकि अच्छी ऊपरी आमदनीवाला कभी तरक्की के झंझट में नहीं पड़ता ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #18
    Harishankar Parsai
    “बड़े कठोर आदमी है। शादी -ब्याह नहीं किया। न बाल - बच्चे। घूस भी नहीं चलेगी।”
    Harishankar Parsai, विकलांग श्रद्धा का दौर

  • #19
    Harishankar Parsai
    “मैं काका की सलाह मानकर फजीहत में पड़ गया । एक दिन वे कहने लगे, "आयुष्मान, कोई लेबिल अपने ऊपर चिपका लो, वरना किसी दिन जेल चले जाओगे । तुम्हें बेकार घूमते देखकर किसी दिन कोई पुलिसवाला पूछेगा—क्या नाम है तेरा ? बाप का नाम क्या है? कहाँ नौकरी करता है? तुम अपना और बाप का नाम तो बता दोगे, पर तीसरे सवाल के जवाब में कहोगे—नौकरी कहीं नहीं करता । यह सुनकर पुलिसवाला कहेगा-नौकरी नहीं करता? तब कोई चोर-उचक्का है तू । वह तुम्हें पकड़कर ले जाएगा । इस देश में जो किसी की नौकरी नहीं करता, वह चोरसमझा जाता है । गुलामी के सिवा शराफत की कोई पहचान हम जानते ही नहीं हैं ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #20
    Harishankar Parsai
    “एक दिन तरुणों ने उनसे कहा, “प्रातःस्मरणीयो, सुनामधन्यो! आप अब वृद्ध हुए— वयोवृद्ध, ज्ञानवृद्ध और कलावृद्ध हुए । आप अब देवता हो गए । हम चाहते हैं कि आप लोगों को मन्दिर में स्थापित कर दें । वहाँ आप आराम से रहें और हमें आशीर्वाद दें ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी

  • #21
    Harishankar Parsai
    “खुद चाहे कुछ न करूँ, पर दूसरों के काम में दखल जरूर दूँगा ।”
    Harishankar Parsai, निठल्ले की डायरी



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