Jess > Jess's Quotes

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  • #1
    Munshi Premchand
    “और स्नेह भी वह नहीं, जो प्रगल्भ होता है और अपनी सारी कसक शब्दों में बिखेर देता है। यह मूक स्नेह था, खूब ठोस, रस और स्वाद से भरा हुआ।”
    Premchand, Mansarovar - Part 1 (Hindi)

  • #2
    Munshi Premchand
    “हूँ। यह अफसरी मेरे और उसके बीच में दीवार बन गई है। मैं अब उसका लिहाज पा सकता हूँ, अदब पा सकता हूँ, साहचर्य नहीं पा सकता। लड़कपन था, तब मैं उसका समकक्ष था। यह पद पाकर अब मैं केवल उसकी दया योग्य हूँ। वह मुझे अपना जोड़ नहीं समझता। वह बड़ा हो गया है, मैं छोटा हो गया हूँ।”
    Premchand, Mansarovar - Part 1 (Hindi)

  • #3
    Munshi Premchand
    “जाने। उसने सब घी मांस में डाल दिया। लालबिहारी”
    Munshi Premchand, बड़े घर की बेटी



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