“इंजीनियरिंग कॉलेज में अगर कोई लड़का नोट्स बनाता है तो उसको सच्चा इंजीनियर नहीं बोला जा सकता। कभी-कभी लगता है अगर कॉलेज में लड़कियाँ ना होतीं तो कभी किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज में कोई नोट्स बन ही ना पाता। जैसा हर लड़की के साथ होता है, जैसे-जैसे वो करीब आती है उसकी टोका-टाकी बढ़ जाती है। एक दिन ऐसा भी आता है जब हॉस्टल जाने से पहले वो bye के साथ take care भी बोलने लगती है। सुबह breakfast के लिए उठाने लगती है। पेपर में पहले से ही नोट्स की एक फोटोकॉपी बना के रखती है। ये सभी प्यार/फ्रेंडशिप जैसी चीज के symptom हुआ करते थे, हुआ करते हैं। प्यार लड़के की तरफ से और फ्रेंडशिप लड़की कि तरफ से।”
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Divya Prakash Dubey,
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