Megha > Megha's Quotes

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  • #1
    Munshi Premchand
    “जिस तरह सूखी लकड़ी जल्दी से जल उठती है, उसी तरह क्षुधा (भूख) से बावला मनुष्य ज़रा-ज़रा सी बात पर तिनक जाता है।”
    Munshi Premchand, बड़े घर की बेटी

  • #2
    Munshi Premchand
    “और स्नेह भी वह नहीं, जो प्रगल्भ होता है और अपनी सारी कसक शब्दों में बिखेर देता है। यह मूक स्नेह था, खूब ठोस, रस और स्वाद से भरा हुआ।”
    Premchand, Mansarovar - Part 1 (Hindi)



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