* Title: गांधारी: महाभारत के नारी पात्र [Gandhari: Mahabharat k Nari Patra]
* Author: Sushil Kumar, सुशील कुमार
*ISBN: 9393232490, 978-9393232496
* Publisher: Samayik Prakashan
* Publication: 30 June 2025
* Page count: 256
* Format: Paperback
* Description: कालजयी महाकाव्य ‘महाभारत’ का अभिनंदन ‘पंचम वेद’ कहकर किया जाता रहा है। इस वृहद् ग्रंथ के संबंध में मान्यता रही है कि ‘जो महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है।’ अध्यात्म एवं ज्ञान की उच्चतम स्थापनाओं से संपन्न यह महाग्रंथ भारतीय संस्कृति का विश्वकोश माना जाता है। इसकी आधारभूत संकल्पनाएं ही वर्तमान भारतीय सभ्यता एवं समाज की आधारभूमि रही हैं। लोक कल्याण के प्रति जागरूक भारतीय नारी आज समानता के अधिकार तथा सहज सम्मान के लिए जो रचनात्मक आंदोलन कर रही है, उसकी सफलता की शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है— 6 खंडों में उपन्यास-माला महाभारत के नारी पात्रें की गौरव गाथा सत्यवती, गांधारी, कुंती, देवकी, रुक्मिणी और पांचाली। स्वभावतः इस महाकाव्य की समर्थ नारियां हमारी संस्कृति के लिए—विशेषकर भारतीय स्त्री के लिए दीपस्तंभ की ज्योति की भांति युगों से दिशा-निर्देश करती रही हैं। उनमें से एक हैं—गांधारी गांधारी अपने-आप में सुलोचना, सर्वांगसुंदरी एवं सुसंस्कृत युवती थीं। संभवतः वह अपने युग की सबसे पीड़ित-प्रताड़ित स्त्री रहीं। पति धृतराष्ट्र जन्मांध थे। पति-परायणा गांधारी ने स्वयं अपने सुंदर नेत्रों पर जीवन-भर के लिए पट्टी बांध ली। किंतु पति नेत्र से ही नहीं, पुत्र के मोह और राज्य के लोभ में मोहांध भी थे। उन जैसा मोहांध पति और दुर्योधन तथा दुःशासन जैसे कुटिल, अनाचारी पुत्रें से घिरी गांधारी जीवन में एकाध बार ही मानवीय दुर्बलता से व्यग्र हुई थीं। इस उपन्यास में गांधारी की न्यायप्रियता तथा मानवीयता के लिए सतत् संघर्षरत उदार नारी का दर्शन मिलता है।
* Author: Sushil Kumar, सुशील कुमार
*ISBN: 9393232490, 978-9393232496
* Publisher: Samayik Prakashan
* Publication: 30 June 2025
* Page count: 256
* Format: Paperback
* Description: कालजयी महाकाव्य ‘महाभारत’ का अभिनंदन ‘पंचम वेद’ कहकर किया जाता रहा है। इस वृहद् ग्रंथ के संबंध में मान्यता रही है कि ‘जो महाभारत में नहीं है, वह कहीं नहीं है।’ अध्यात्म एवं ज्ञान की उच्चतम स्थापनाओं से संपन्न यह महाग्रंथ भारतीय संस्कृति का विश्वकोश माना जाता है। इसकी आधारभूत संकल्पनाएं ही वर्तमान भारतीय सभ्यता एवं समाज की आधारभूमि रही हैं। लोक कल्याण के प्रति जागरूक भारतीय नारी आज समानता के अधिकार तथा सहज सम्मान के लिए जो रचनात्मक आंदोलन कर रही है, उसकी सफलता की शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है— 6 खंडों में उपन्यास-माला महाभारत के नारी पात्रें की गौरव गाथा सत्यवती, गांधारी, कुंती, देवकी, रुक्मिणी और पांचाली। स्वभावतः इस महाकाव्य की समर्थ नारियां हमारी संस्कृति के लिए—विशेषकर भारतीय स्त्री के लिए दीपस्तंभ की ज्योति की भांति युगों से दिशा-निर्देश करती रही हैं। उनमें से एक हैं—गांधारी गांधारी अपने-आप में सुलोचना, सर्वांगसुंदरी एवं सुसंस्कृत युवती थीं। संभवतः वह अपने युग की सबसे पीड़ित-प्रताड़ित स्त्री रहीं। पति धृतराष्ट्र जन्मांध थे। पति-परायणा गांधारी ने स्वयं अपने सुंदर नेत्रों पर जीवन-भर के लिए पट्टी बांध ली। किंतु पति नेत्र से ही नहीं, पुत्र के मोह और राज्य के लोभ में मोहांध भी थे। उन जैसा मोहांध पति और दुर्योधन तथा दुःशासन जैसे कुटिल, अनाचारी पुत्रें से घिरी गांधारी जीवन में एकाध बार ही मानवीय दुर्बलता से व्यग्र हुई थीं। इस उपन्यास में गांधारी की न्यायप्रियता तथा मानवीयता के लिए सतत् संघर्षरत उदार नारी का दर्शन मिलता है।
*Language: Hindi
*Link: https://www.amazon.in/Gandhari-%E0%A4...
*Hardcover: https://www.amazon.in/Gandhari-%E0%A4...