स्वप्न में भी आने लगी। जैसी-जैसी घटनाएं मेरे साथ हकीकत में
इंसान यथार्थ में जीता है, यथार्थ की बातों पर ही विश्वास और अमल करता है, यथार्थ ही उसका भूत है, यथार्थ ही उसका वर्तमान है। परन्तु इंसानों का मन, यथार्थ से ज्यादा सपनों पर लगा रहता है। उसे तरह-तरह के खट्टे-मीठे सपने आने लगते हैं। फिर उन सपनों को ही वह अपना भविष्य मानकर जीने लगता है।
Mukesh’s 2025 Year in Books
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