John

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“मुझे पढ़कर अब इन लोगो को मुझसे हमदर्दी होती है,
मोहब्बत तुमसे की है हमने हम पर कुछ तो तरस खाया करो ।।”
Nikhil Kaithwar

“अब तमन्ना नहीं रही मोहब्बत की,
तुम्हारे बिन अब दिल नहीं लगता ।।
रात की बात क्या करे हम ,
हमारा तो दिन में भी दिल नहीं लगता ।।”
Nikhil Kaithwar

“भूलने को सोचा उन्हें पर भूल कहा पा रहे है,
हवाओं में उनकी खुशबू फैली हुई है,
अब क्या सांस लेना छोड़ दे ।।”
Nikhil Kaithwar

“कितनो को मोहब्बत है तुमसे हम किस को अपना रकीब बताए,
और तुम्हें खोने से डरते है हम तुम हो नहीं हमारे,
तुमसे कितनी मोहब्बत है तुम्हें कैसे बताए ।।”
Nikhil Kaithwar

“तुझसे मोहब्बत करके मोहब्बत छोड़ देना,
और फिर मोहब्बत करना कैसा है ।।
अच्छा वह सब तो ठीक है ये बताओ,
घूट - घुट के जीने से मरना कैसा है ।।”
Nikhil Kaithwar

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