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Nitin Mohan
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“और उसे गोद में उठाकर प्यार करने लगी। सहसा उसके हाथ में चिमटा देखकर वह चौंकी। "यह चिमटा कहाँ था?" "मैंने मोल लिया है।" "कै पैसे में?" "तीन पैसे दिये।" अमीना ने छाती पीट ली। यह कैसा बेसमझ लड़का है कि दोपहर हुई, कुछ खाया न पिया। लाया क्या, चिमटा! बाेली, "सारे मेले में तुझे और कोई चीज़ न मिली, जो यह लोहे का चिमटा उठा लाया?" हामिद ने अपराधी-भाव से कहा, "तुम्हारी उँगलियाँ तवे से जल जाती थीं, इसलिए मैने इसे लिया।" बुढ़िया का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल गया, और स्नेह भी वह नहीं, जो प्रगल्भ होता है और अपनी सारी कसक शब्दों में बिख़ेर देता है। यह मूक स्नेह था, ख़ूब ठोस, रस और स्वाद से भरा हुआ। बच्चे में कितना त्याग, कितना सदभाव और कितना विवेक है! दूसरों को खिलौने लेते और मिठाई खाते देखकर इसका मन कितना ललचाया होगा! इतना ज़ब्त इससे हुआ कैसे? वहाँ भी इसे अपनी बुढ़िया दादी की याद बनी रही। अमीना”
― मानसरोवर 1: प्रेमचंद की मशहूर कहानियाँ
― मानसरोवर 1: प्रेमचंद की मशहूर कहानियाँ
“There are books so alive that you're always afraid that while you weren't reading, the book has gone and changed, has shifted like a river.”
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“Well, it often happens that people with good eyesight fail to see what is right in front of them.”
― The Best of Ruskin Bond
― The Best of Ruskin Bond
“न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं। इन्हें वह जैसे चाहती हैं, नचाती हैं। लेटे”
― मानसरोवर 1: प्रेमचंद की मशहूर कहानियाँ
― मानसरोवर 1: प्रेमचंद की मशहूर कहानियाँ
Nitin’s 2025 Year in Books
Take a look at Nitin’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
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