“हमारे पहले कदम से लेकर आखिरी कदम तक तय की गयी दूरी की लंबाई जिन्दगी के बराबर होती है । इसीलिए शायद जिन्दगी हमें भटकाती है ताकि हम अपने हिस्से भर की जिन्दगी चल पायें। ये कहानियाँ भटककर संभलने और संभलकर दुबारा भटकने के दौरान तय की गयी दूरियाँ भर हैं”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
“पता नहीं अगर कभी कोई हिसाब लगता कि समाज ने कितने घरों को जोड़ा और कितनों को तोड़ा है तो शायद ही समाज दुनिया की किसी भी कॉलोनी में मुँह दिखाने लायक बचता।”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
“जो भी प्यार पूरे नहीं हो पाते उनको चक्कर ही बोला जाता है न, प्यार पूरे होने का केवल और केवल इतना मतलब है कि आपने जिस लड़की को I love you बोला था उसके घर आप बैंड बाजे के साथ पहुँच पाये। आगे शादी चले न चले उससे प्यार के पूरे और अधूरेपन पर कोई असर नहीं पड़ता”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
“क्यूँ ये आदमी आदमी बनने पर तुला हुआ था”
― Terms and Conditions Apply
― Terms and Conditions Apply
“एक उम्र होती है जब क्लास की खिड़की से बाहर आसमान दूर कहीं जमीन से मिल रहा होता है और हमें लगता है कि शाम को खेलते-खेलते हम ये दूरी हम तय कर लेंगे। दूरी तय करते-करते जिस दिन हमें पता चलता है कि ये दूरी तय नहीं हो सकती, उसी दिन हम बड़े हो जाते हैं”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
Sachin’s 2025 Year in Books
Take a look at Sachin’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
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