“कुछ लोग सुख में ज़्यादा खा लेते हैं और दुख में खा नहीं पाते। पांडे जी आदत से एकदम कम्यूनिस्ट थे। inter-cast शादी हो या तेरहवीं दोनों में समान भाव से खाते थे।”
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“क्यूँ ये आदमी आदमी बनने पर तुला हुआ था”
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“पता नहीं अगर कभी कोई हिसाब लगता कि समाज ने कितने घरों को जोड़ा और कितनों को तोड़ा है तो शायद ही समाज दुनिया की किसी भी कॉलोनी में मुँह दिखाने लायक बचता।”
― मसाला चाय
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“जो भी प्यार पूरे नहीं हो पाते उनको चक्कर ही बोला जाता है न, प्यार पूरे होने का केवल और केवल इतना मतलब है कि आपने जिस लड़की को I love you बोला था उसके घर आप बैंड बाजे के साथ पहुँच पाये। आगे शादी चले न चले उससे प्यार के पूरे और अधूरेपन पर कोई असर नहीं पड़ता”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
“आज कल की किसी भी शादी में जय माल के टाइम पर जितनी आसानी से लड़के लड़कियां एक दूसरे से इशारों में बात कर लेते हैं उसको देख के ये जानना करीब करीब असंभव है कि शादी love है या arrange।”
― मसाला चाय
― मसाला चाय
Sachin’s 2024 Year in Books
Take a look at Sachin’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
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