“आवेश से बचो वत्स! हम विचार कर रहे हैं; और विचार के लिए आवेश हलाहल विष है।”
― बंधन : महासमर भाग - १
― बंधन : महासमर भाग - १
“उसे नीति और न्याय का परामर्श दूँगा। न्याय, धर्म का दूसरा नाम है माता! वह न्याय की रक्षा करेगा, तो न्याय उसकी रक्षा कर लेगा।”
― बंधन : महासमर भाग - १
― बंधन : महासमर भाग - १
“जब दृष्टि में सिद्धान्त नहीं, व्यक्ति होता है, तो निर्णय न्याय के आधार पर नहीं, व्यक्ति की इच्छा के आधार पर होते हैं।”
― बंधन : महासमर भाग - १
― बंधन : महासमर भाग - १
“मेरी दो बातें स्मरण रखो पुत्र! और उनपर विश्वास भी करो। पहली यह कि ईश्वरीय नियमों का जब तक स्वयं अनुभव न करो, दूसरे व्यक्ति के कहने मात्र से उसका विश्वास मत करो। दूसरी यह कि, यदि तुम वस्तुतः जल में स्थित हो, तब ही तैरने के लिए हाथ-पैर मारो।”
― हिडिम्बा
― हिडिम्बा
“जिसका निर्णय न्याय है, वचन विधान है और चिन्तन त्रिकाल का सत्य है—उस व्यक्ति को ग्वाला कहकर उसकी उपेक्षा का प्रयत्न सचमुच क्षुद्रता का प्रदर्शन है।”
― अभिज्ञान
― अभिज्ञान
Akash’s 2025 Year in Books
Take a look at Akash’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
Akash hasn't connected with their friends on Goodreads, yet.
Favorite Genres
Polls voted on by Akash
Lists liked by Akash

![गोदान [Godaan] by Munshi Premchand गोदान [Godaan] by Munshi Premchand](https://i.gr-assets.com/images/S/compressed.photo.goodreads.com/books/1205467570l/694226._SY75_.jpg)











