Aali Pant
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बुज़ुर्ग कहते थे कि तहज़ीब किसी नवाब के शबिस्तान में रखा हुआ गुलदान नहीं कि चन्द ख़ास लोग ही उसके मालिक-मुख़्तार बन जाएँ। तहज़ीब तो फ़क़ीर के हुजरे से उठने वाली लोबान की वो ख़ुशबू है जो बग़ैर किसी भेदभाव के अमीर और ग़रीब दोनों को महकाती है।
ज़बान जो दिल छू ले। क्या अंदाज़ है, क्या लाजवाब तरीका है। लखनऊ के खास लोगों पर आधारित ये खास किताब। सब्जी वाले से लेकर, रिक्शे वाले, नवाब, तवाएफें, प्रोफेसर, आदि, लखनऊ की आबो हवा में ऐसी जादूगरी है, कि हर इंसान हर पेशा, सब ही अदाकार हैं। बेहद अच्छी किताब।
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Aali’s 2025 Year in Books
Take a look at Aali’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
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