विभू सिंह

Add friend
Sign in to Goodreads to learn more about विभू.


Kindle Paperwhite...
Rate this book
Clear rating

 
Padam Puran (Sans...
Rate this book
Clear rating

progress: 
 
  (24%)
Aug 24, 2022 11:29AM

 
See all 6 books that विभू is reading…
Loading...
सुरेन्द्र मोहन पाठक
“अखबार”
सुरेन्द्र मोहन पाठक, Maut Ka Farmaan (Vimal Book 7)

सुरेन्द्र मोहन पाठक
“इससे ज्यादा गर्म ड्रिंक्स के शौकीन हो” - वह शरारतभरे स्वर में बोली - “तो तुम्हें शेखावत साहब के आने तक इन्तजार करना पड़ेगा ।” “जी नहीं ।” - मैं बोला - “इस वक्त यही ठीक है । मुझे इतनी ज्यादा गर्म चीजों का शौक नहीं कि मुंह ही जल जाये और” - मैं एक क्षण ठिठका और बोला - “कलेजा भी ।” वह हंसी । मैंने कॉफी का कप उठाया और बड़े अर्थपूर्ण ढंग से उसे देखता हुआ बोला -”
सुरेन्द्र मोहन पाठक, Maut Ka Farmaan (Vimal Book 7)

“मस्तीमें, आनन्दमें होता है, तब उसके मुखसे स्वतः गीत निकलता है। भगवान्‌ने इसको मस्तीमें आकर गाया है, इसलिये इसका नाम ‘गीता’ है। यद्यपि संस्कृत व्याकरणके नियमानुसार इसका नाम ‘गीतम्’ होना चाहिये था, तथापि उपनिषद्-स्वरूप होनेसे”
Ramsukhdas, Gita Sadhak Sanjeevani, Code 0006, Hindi, Gita Press Gorakhpur (Official)

“इससे अवश्य ही सहायता मिलेगी। मुझे लगता है कि आपके सभापति बनने से इसे बहुत लाभ होगा।’’201 करीब एक महीने बाद उन्होंने गांधी से उन्हें अध्यक्ष न बनाने का अनुरोध करते हुए पत्र लिखा था। गांधी ने भी उन्हें आश्वासन दिया था कि वे उनके नाम के लिए अनावश्यक दबाव नहीं बनाएँगे।202 इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि इस समय यह किसी के लिए एक बुरा कार्य ही होगा।203 यहाँ तक कि मोतीलाल, जो कि अपने बेटे को कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते थे, उन्होंने भी महसूस किया कि जवाहरलाल की इच्छा के विरुद्ध उन्हें इसके लिए बाध्य करना उनके और देश-हित में उचित नहीं होगा।204 परंतु गांधी इस कार्य में लगे रहे और जवाहरलाल सितंबर 1929 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिये गए। गांधी ने ‘यंग इंडिया’ में एक लेख लिखा कि जवाहरलाल का अध्यक्ष बनना गांधी को अध्यक्ष बनाने जैसा ही था—जवाहरलाल एक तरह से गांधी के छद्म अहं के रूप में ही थे।205 उन्हें यह नहीं महसूस हुआ कि इस तरह का कथन जवाहरलाल के लिए सम्मानजनक नहीं था और इससे वे गांधी की छवि के रूप में ही दरशाए गए थे। जवाहरलाल स्वयं भी इस परिणाम से प्रसन्न नहीं थे। उन्हें लगता था कि वे किसी के”
Rudrangshu Mukherjee, Nehru Banam Subhash: A Historical Perspective on Jawaharlal Nehru and Subhash Chandra Bose by Rudrangshu Mukherjee

year in books
Rohan B...
8 books | 52 friends

Dhruv T...
2 books | 104 friends

Vaibhav...
7 books | 15 friends

Raunak ...
1 book | 196 friends

Shivani...
2 books | 91 friends

Nitin D...
1 book | 26 friends

Iqbal A...
1 book | 19 friends

Rahul V...
2 books | 47 friends

More friends…

Favorite Genres



Polls voted on by विभू

Lists liked by विभू