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Amaan Shaikh
“अंतिम प्रस्थान
खुद की चिता को अब स्वयं आग करते हैं,
चलो इस अंतहीन पीड़ा का अब बहिष्कार करते हैं।
मीरा के उस प्रेम का अब राग करते हैं,
वैराग्य की राह का अब बस जाप करते हैं।
चलो इस बार भी हम सबको माफ़ करते हैं,
विरह के आलाप से खुद को ही साफ़ करते हैं।
चलो अब प्रेम का ही प्रकाश करते हैं,
प्रेम त्याग कर अब खुद का ही त्याग करते हैं।
अपनी अंतहीन पीड़ा का संहार करते हैं,
बैसाखी से अब सागर पार करते हैं।
चिता की अग्नि से अब आखिरी श्रृंगार करते हैं,
चलो हम भी अब खुद को माफ़ करते हैं।”
Amaan Shaikh , गुनहग़ार (Gunahgar): by Amaan Shaikh

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