Shashi Vallabh Sharma > Quotes > Quote > Manish liked it

“मानसरोवर सा मन मेरा तुम हो धवल कमलिनी सी,
छूटी लट छूने को अधरा मानो भँवरी पागल सी,
मधुर निशा में दमक रही हो सूर्य प्रभा के मोती सी,
नमन हो गया है मन मेरा हो तुम दिव्य रमा जैसी।”
Dr. Shashi Vallabh Sharma, Muktak Shatak

No comments have been added yet.