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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 126 of 136
इतना घनत्व प्रेम में नहीं होता कि वह अंतरिक्ष-जैसे फैले जीवन के शून्य को सदैव के लिए भर सके। कुछ थोड़े-से क्षण ऐसे अवश्य आते हैं जब वह इतना फैल जाता है कि उसका ओर-छोर ढूँढे नहीं मिलता। पर देखते ही देखते फिर सिकुड़कर यूँ सिमट जाता है कि पता नहीं चलता, वह कहाँ समा गया है।
Mar 30, 2020 02:39AM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 101 of 136
क्षण के आगे समर्पण करके सदा के लिए उसे स्मृति में सँजोया जा सकता है, पर घटित समय में बाँधकर नहीं रखा जा सकता।
Mar 30, 2020 12:41AM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 100 of 136
वह खड़ी थी और मकड़ी के धागे-सा महीन भावना का जाला उसके चारों और बुना जा रहा था। जानबूझकर, वह उसके बीच खड़ी थी और जाले में फँसती जा रही थी। धागा इतना महीन था कि एक झटके में उसे तोड़कर कभी भी बाहर निकला जा सकता था। पर वह निकलना चाहती ही कहाँ थी? वह चाहती थी, धागा खिंचे, उसके चारों ओर लिपटे, खिंचे और फिर लिपट जाए।
Mar 30, 2020 12:35AM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 81 of 136
मनुष्य जब विश्वास को बीच में ले आता है तब तर्क बेकार हो जाता है।
Mar 29, 2020 10:25PM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 81 of 136
मेरे विचार में तो प्रेम का होना और दाँत में दर्द का होना एक ही बात है। जब होता है मनुष्य उसे छोड़ संसार-भर से वैरागी हो उठता है: दत्तचित्त, भावप्रण, उसकी सेवा-शुश्रूषा करता है, अन्य भौतिक पदार्थों से घृणा करने लगता है। पर फिर जब वह चुक जाता है तो सब सामान्य हो जाता है; उसकी स्मृति की कसक-भर शेष रह जाती है, और कुछ नहीं।
Mar 29, 2020 10:24PM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 69 of 136
लिखूँगी, उसने सोचा, एक दिन लिखूँगी कुछ- कहानी, उपन्यास, निबन्ध या नाटक: कुछ ऐसा जो लिखकर मुझे आत्मसंतुष्टि मिले: कुछ ऐसा जो मेरे भीतर यूँ कुलबुलाता रहा हो कि बिना लिखे चैन न आ रहा हो। कभी-कभी वह सोचती है, चारों तरफ फैली इस सूनी बंजर ऊब से तो बेहतर है कि उसके साथ कोई भयंकर त्रासदी घट जाए, जिससे वह उसे शब्दों में सरस आकार तो दे सके। अभी तो कुछ लिखने बैठती है तो उस पर भी उसकी नीरस निष्क्रियता का बोझ लद जाता है।
Mar 29, 2020 09:13PM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 69 of 136
लगता है अच्छी शिक्षिका बनने की गुण उसमें विद्यमान नहीं हैं। अपने यहाँ अच्छा शिक्षक वही माना जाता है जिसके पास अपना सोचने-कहने को कुछ न हो, जो दूसरों को पढ़कर वर्ण-अक्षर सहित याद रखने में जितना माहिर हो, रटे-रटाये को नोट्स की भाषा में लिखवाने में उतना ही पारंगत।
Mar 29, 2020 09:01PM Add a comment
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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 47 of 136
अभी जितेन प्रगाढ़ निद्रा में लीं है पर डेट तक नहीं। जितेन की नींद ऐसी ही होती है, गहरी पर लम्बी नहीं। वह जब भी सोता है तो गहरी नींद और जगता है तो तरोताज़ा। बिस्तर से उछलकर उठता है और अपने काम में लग जाता है। एक झटके के साथ अतीत को अलग फेंक देता है और वर्तमान से जूझने लगता है। जो लोग वर्तमान में उसका साथ नहीं दे सकते, वे पिछड़ जाते हैं, अतीत में सिमट जाते हैं, जितेन उसकी ओर वापस नहीं मुड़ता।
Mar 28, 2020 10:33AM Add a comment
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