विकास 'अंजान'’s Reviews > ओस की बूँद > Status Update
विकास 'अंजान'
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आज फिर कहीं जाना पड़ रहा है। कल सफर के लिए कुएँ का राज़ लेकर गया था और आज ओंस की बूँद। मैं रज़ा साहब के आधा गाँव का काफी नाम सुना है। मैं अक्सर लेखक की सबसे प्रसिद्ध कृति को सबसे आखिर में पढ़ने की कोशिश करता हूँ। ये रज़ा साहब की पहली कृति है जो मैं पढूँगा।
— Sep 03, 2016 09:04PM
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विकास’s Previous Updates
विकास 'अंजान'
is on page 40 of 112
शहला का प्यार बिलकुल पर्दे की बूबू था। वह उसे दुनिया भर के ख़यालों के गूदड़ में छिपाकर रखती थी। बस जब आसपास कोई न होता तो दिमाग के तमाम दरवाज़े और दरीचे खूब जमका के बंद करने के बाद वह गूदड़ी की पोटली निकालती और उसमे से अपने प्यार के टुकड़े अलग करती और अपनी उँगलियों से सहला-सहलाकर उनकी शिकनें दूर करती।
— Sep 04, 2016 10:34PM
विकास 'अंजान'
is on page 38 of 112
कल राही भाई भी आ गए थे। पता चला कि कोई आबेदा ज़ैदी हैं, जो अब तक भाई साहब की राह देख रही हैं।और एक तो वही शरीफा घोड़ी है। अब तक ठंडी साँसे लेती हैं।राही भाई कह रहे थे कि उनकी ठंडी साँसों की वजह से अलीगढ़ का मौसम बदल गया है।पिछले तीन साल में गर्मी नहीं पड़ी है और खरबूजे की फसल खराब हो रही है और खरबूजेवाले डेपुटेशन लेकर आने वाले हैं भाई साहब..."
दोनों सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ी।
— Sep 04, 2016 10:20PM
दोनों सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ी।
विकास 'अंजान'
is on page 38 of 112
कल राही भाई भी आ गए थे। पता चला कि कोई आबेदा ज़ैदी हैं, जो अब तक भाई साहब की राह देख रही हैं।और एक तो वही शरीफा घोड़ी है। अब तक ठंडी साँसे लेती हैं।राही भाई कह रहे थे कि उनकी ठंडी साँसों की वजह से अलीगढ़ का मौसम बदल गया है।पिछले तीन साल में गर्मी नहीं पड़ी है और खरबूजे की फसल खराब हो रही है और खरबूजेवाले डेपुटेशन लेकर आने वाले हैं भाई साहब..."
दोनों सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ी।
— Sep 04, 2016 10:18PM
दोनों सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ी।
विकास 'अंजान'
is on page 38 of 112
कल राही भाई भी आ गए थे। पता चला कि कोई आबेदा ज़ैदी हैं, जो अब तक भाई साहब की राह देख रही हैं।और एक तो वही शरीफा घोड़ी है। अब तक ठंडी साँसे लेती हैं।राही भाई कह रहे थे कि उनकी ठंडी साँसों की वजह से अलीगढ़ का मौसम बदल गया है।पिछले तीन साल में गर्मी नहीं पड़ी है और खरबूजे की फसल खराब हो रही है और खरबूजेवाले डेपुटेशन लेकर आने वाले हैं भाई साहब..."
दोनों सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ी।
— Sep 04, 2016 10:17PM
दोनों सहेलियाँ खिलखिलाकर हँस पड़ी।
विकास 'अंजान'
is on page 36 of 112
वह रोने लगती। और मिरासनें ढोल बजा-बजाकर गाने लगतीं:
"कारी कामर वारे से जोड़ी प्रीति मैं।
लोग कहे कारी कामरिवारे, म्हारे लाख करोड़ी।.."
बेचारी मिरासनों को क्या मालूम था कि यह 'कारी कामरि' वाला मुहम्मद नहीं कृष्ण है। अरब का गड़रिया नहीं बल्कि हिंदुस्तान का अहीर है।
पता यह चला कि असल चीज़ मुहम्मद या कृष्ण नहीं है, बल्कि असल चीज़ 'काली कमली' है।
— Sep 04, 2016 09:09PM
"कारी कामर वारे से जोड़ी प्रीति मैं।
लोग कहे कारी कामरिवारे, म्हारे लाख करोड़ी।.."
बेचारी मिरासनों को क्या मालूम था कि यह 'कारी कामरि' वाला मुहम्मद नहीं कृष्ण है। अरब का गड़रिया नहीं बल्कि हिंदुस्तान का अहीर है।
पता यह चला कि असल चीज़ मुहम्मद या कृष्ण नहीं है, बल्कि असल चीज़ 'काली कमली' है।
विकास 'अंजान'
is on page 20 of 112
घर! देखने और सुनने में कैसा फटीचर लगता है ये शब्द! परंतु यह एक शब्द मनुष्य की हज़ारों- हज़ार शताब्दियों का इतिहास है। तो मनुष्य अपने इतिहास से भागकर कहाँ जाए? यह शब्द दुम की तरह साथ लगा रहेगा।…घर। यह शब्द मुहब्बत, नफ़रत, धर्म और भगवान सबसे बड़ा है।
— Sep 03, 2016 10:01PM

