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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 13 of 108
हरिशंकर परसाई जी अपने व्यंग लेखन के लिए विख्यात है। व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि अगर आप हिंदी पढ़ सकते हैं तो आपको उनके व्यंग लेखों को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए। खैर, ये किताब व्यंग नहीं है और इसीलिए इसमें रूचि जगी थी। आगे देखते हैं क्या होता है।
Jan 13, 2018 07:25PM
तट की खोज

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विकास 'अंजान'
विकास 'अंजान' is on page 25 of 108
मैं शुरू से ही सिर ऊँचा करके चलती हूँ। सिर नीचा करके चोरी की नज़र डालने की अपेक्षा,ईमानदारी की दृष्टि डालना, अधिक अच्छा है। परंतु ऊपर देखना बर्दाश्त नहीं किया जाता। जो ऊपर देख लेती हैं, उसे कलंक से पोत देने के लिए लोगों के मन की कटोरी में काले रंग तैयार होते रहते हैं। फिर किसी दिन जीभ की कूची से उसका चेहरा पोत दिया जाता है।
Jan 13, 2018 09:28PM
तट की खोज


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