विकास 'अंजान'’s Reviews > काली आँधी > Status Update
विकास 'अंजान'
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मैंने पूछा तो लल्लू बाबू निश्छल हँसी हँसे और बोले- भइये, तुम भी एक खुराक पी लो,तबियत हरी हो जायेगी!..ज़रा नमकीन का इंतजाम करो भइये! कहते हुए उन्होंने दूसरी खुराक पर अँगूठा लगाया और उसे भी पी गये। फिर दाँत चूसते हुए बोले- क्या करें भइये, अपन लोगों की ज़िंदगी ही ऐसी है..इस ज़िन्दगी का गुरुमंत्र है- हर काम करो,पर उसकी शक्ल बदलकर करो..समझे भइये!
— Jan 13, 2019 07:44AM
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विकास 'अंजान'
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कोई रास्ता पलटता नहीं मालती...रास्ते तो, अपनी राह चले जाते हैं..आदमी पलट जाता है...लेकिन मैं अब आदमी कहाँ रह गया हूँ...मैं अब सिर्फ एक रास्ता रह गया हूँ...
— Jan 13, 2019 05:41PM

