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Bhawna
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लो वह आ गया।
मैं नही जानता कि तु कितने काल से मुझसे मिलने मेरे निकट निरन्तर आ रहा है, तेरे सुर्य और चन्द्र तुझे सदा के लिये मुझसे छिपा सकते नही.....मैं तेरे मधुर आगमन की मंद गंध वायु मे अनुभव करने लगा हूँ।
— Mar 15, 2019 03:44AM
मैं नही जानता कि तु कितने काल से मुझसे मिलने मेरे निकट निरन्तर आ रहा है, तेरे सुर्य और चन्द्र तुझे सदा के लिये मुझसे छिपा सकते नही.....मैं तेरे मधुर आगमन की मंद गंध वायु मे अनुभव करने लगा हूँ।
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Bhawna
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उसकी रास्ता देखते हुए प्रायः सारी रात बीत गयी। मुझे डर है की जब मैं थक कर सो जाउ तो कहीं वो मेरे द्वार पर न अा जाए । मित्रो उसके लिये द्वार खुला रखना -उसे कोई मना न करना।
— Feb 18, 2019 01:03AM
