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विकास 'अंजान'
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पुस्तक काफी रोचनीय है। मैं सोचता हूँ ये पुस्तक और भी रोचनीय हो पाती अगर मैंने पूरा शरत रचनावली पढ़ी होती। खैर, अभी इसका आनंद लूँगा और दुबारा तब पढूँगा जब उनकी रचनाओं को पढ़ चुका होँगा।
Sep 05, 2014 03:06AM
आवारा  मसीहा


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