Goodreads helps you follow your favorite authors. Be the first to learn about new releases!
Start by following गुरुदत्त.
Showing 1-2 of 2
“जब कर्मकाण्ड उद्देश्य-पूर्ति का विचार छोड़कर स्वतः करने योग्य कार्य बन जाता है, तब वह आडम्बर हो जाता है।”
― दिग्विजय [Digvijaya]
― दिग्विजय [Digvijaya]
“कर्म वही है जिससे कर्म के उद्देश्य की पूर्ति हो। उस प्रकार किया गया कर्म ही कर्मकाण्ड हो सकता है।”
― दिग्विजय [Digvijaya]
― दिग्विजय [Digvijaya]




