Daman Ahuja
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August 2020
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Soham se Bharat Yatra tak
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Daman Ahuja
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Gaurav Shah
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“व्यक्ति को जीवन की गतिशीलता का त्याग करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप प्रतिदिन एक या दो घंटे ध्यान करते हैं तो आप सामान्य दायित्वों का पालन करते रहिए। यदि आपका ध्यान करने का तरीक़ा सही है तो आप सामान्य कार्य करते हुए भी मानसिक प्रवाह को जारी रख सकते हैं। यह एक ही विचार को दो तरीक़ों से व्यक्त करने जैसी बात है। आप ध्यान करते समय जिस विचार का अनुसरण करेंगे, वही विचार आपके गतिविधियों में भी व्यक्त होगा।”
― Gupt Bharat ki Khoj
― Gupt Bharat ki Khoj
“Pursue the enquiry ‘Who am I?’ relentlessly. Analyse your entire personality. Try to find out where the I-thought begins. Go on with your meditations. Keep turning your attention within. One day the wheel of thought will slow down and an intuition will mysteriously arise. Follow that intuition, let your thinking stop, and it will eventually lead you to the goal.”
― A Search In Secret India: The classic work on seeking a guru
― A Search In Secret India: The classic work on seeking a guru
“सोचिए कि वे लोग हमेशा किसी न किसी वस्तु के माध्यम से खु़शी प्राप्त करने की इच्छा करते हैं। वह किसी अच्छी चीज़ को खा-पीकर अथवा धर्म के माध्यम से या और किसी ज़रिए से खु़शी प्राप्त करना चाहते हैं। ऐसा सोचने पर आपको मनुष्य की वास्तविक प्रकृति के विषय में संकेत मिल सकता है।’ ‘मैं समझा नहीं।’ महर्षि का स्वर थोड़ा ऊँचा हो जाता है: ‘मनुष्य की वास्तविक प्रकृति आनंद पर आधारित है। खु़शी की तलाश वास्तव में, मनुष्य द्वारा अचेतन रूप से की गई स्वयं की तलाश है क्योंकि स्वयं ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जो कभी नष्ट नहीं होती इसलिए व्यक्ति को जब उसकी प्राप्ति हो जाती है तो उसे असीम आनंद का अनुभव होता है।”
― Gupt Bharat ki Khoj
― Gupt Bharat ki Khoj
“जब मनुष्य को इस बात का पक्का प्रमाण मिल जाता है कि वह वास्तव में एक आत्मा है। यह जान लेने के बाद ही वह आसपास की चीज़ों से अपने मस्तिष्क को मुक्त कर सकता है। ऐसा होने के बाद, वे वस्तुएँ लुप्त होने लगती हैं और बाहर का संसार ओझल होने लगता है। मनुष्य यह जान लेता है कि उसकी अंतरात्मा, उसके भीतर सजीव एवं चेतन रूप में मौजूद है। उससे मिलने वाले आनंद, शांति एवं शक्ति अवर्णनीय हैं। मनुष्य को केवल प्रमाण की आवश्यकता होती है कि उसके भीतर दिव्य और अमर जीवन मौजूद है और”
― Gupt Bharat ki Khoj
― Gupt Bharat ki Khoj
“आध्यात्मिक पुनर्जन्म की प्रसव पीड़ा भी मनुष्य के जीवन में एक महत्त्वपूर्ण घटना है, जिसे वह भूल नहीं सकता। वह व्यक्ति को स्थाई रूप से बदल देती है। कोई व्यक्ति जब उस गहन अवस्था में प्रवेश करता है तो दिमाग़ के भीतर एक तरह का ख़ालीपन बन जाता है। उस ख़ाली स्थान को ईश्वर या - चूँकि आप इस शब्द को नहीं समझते - कहें, आत्मा या कोई अन्य सर्वोच्च शक्ति भर देती है और तब व्यक्ति परम आनंद से भर जाता है। उसके मन में संपूर्ण सृष्टि के प्रति अथाह प्रेम जाग्रत हो जाता है। ऐसे में किसी देखने वाले को शरीर ध्यान में मग्न नहीं, अपितु मृत लगता है क्योंकि उस सर्वोच्च अवस्था में कुछ पल के लिए श्वास भी रुक जाती है।”
― Gupt Bharat ki Khoj
― Gupt Bharat ki Khoj


















