मौसमों के बीच फासले थे - दो

वो लड़का जो सामने के डिपार्टमेंट में था, उस घटना के बाद कुछ न बोला. उसका जीवन प्रेक्टिकल फाइल्स बनाने, फूलों को पहचानने, उनका डिसेक्शन करने, स्लाइड्स बनाने में बीतता रहा. नौकरी लगने की उसे कोई आशा नहीं थी. वह इससे परेशान भी नहीं था. उसे नहीं मालूम था कि जीवन से उसे क्या चाहिए.उसे एक लड़की मिली. वह लड़की एक बार नहीं कई बार उसे देखकर मुस्कुराई. फिर उसके फोन आने लगे. अच्छा लगता था. कई बार अच्छे से ज्यादा अच्छा लगता था. लड़की उसे हर संभव और असंभव अवसर पर फोन करती थी. भरी दोपहर या आधी रात हो, फोन करने के लिए कोई बाधा न थी.मैं तुमसे प्यार करती हूँ.लड़का सर से पाँव तक सिहर उठता. उत्तेजना की लहरें उसे विचलित करने लगती. फोन रखने के घंटों बाद तक वह उसी असर में डूबा रहता. उसे फोन का इंतज़ार रहने लगा. उसने कई बार लड़की से कहा कि वह कोई नियत समय बताये कि कब फोन करेगी. इस तरह लगातार इंतज़ार में जीना कठिन है. उसके भीतर ऐसी चाहना मचलने लगती है कि दौड़कर लड़की के पास पहुँच जाये. लड़की शायद मुस्कुराती थी. शरारत भरी मुस्कान.एक दिन सिक्का उलट गया. जो लड़की उसके लिए जितने एफर्ट लेती थी, उससे अधिक लड़के ने लेने शुरू कर दिए. सिक्के की दूसरी तरफ लड़की की बेरुखी थी. ये बेरुखी बिछोह की आग में ज्वलनशील तरल की तरह गिरती थी. इसी ताप में वह लड़का अचानक उसके पास पहुँच गया. उसने कहा- “अभी मिलने आओ” लड़की ने कहा- “तुम पागल हो क्या? उसने कहा- “तुम आती हो या मैं जाऊं?”वे मिले.रेस्तरां में लड़की ने उसके हाथ को अपनी हथेलियों में लिया. “तुम इतने बेसब्र क्यों हो?”मैं चाहता हूँ कि तुम मुझसे शादी कर लो.अभी?हाँ इसी वक़्त.वह लड़की हंसने लगी. कॉफी की दो प्यालियों में बने दिल पर मिठास उड़ेलते हुए टेढ़ी निग़ाह से देखकर लड़की ने आँख से इशारा किया. उसका मतलब था कि अब क्या सोच रहे हो. लड़के ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की. वह अटल था कि उसे जवाब चाहिए वह कब शादी करेगी.मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, हम साथ में होंगे. मगर इस तरह कैसे संभव है?तुम अचानक कहाँ गायब हो जाती हो?मेरे एग्जाम थे.क्या अचानक आ गए?नहीं, मगर हर रोज़ एक तरीके से बात नहीं हो सकतीक्यों?क्या पागलपन है. समझते क्यों नहीं हो?मैं समझता हूँ और आखिरी बात सुनो, मुझे कल शाम को फोन करके बताना कि कब शादी होगी अगर न बता सको तो फिर फोन न करना.लड़की ने उसके हाथों को फिर से छुआ और बड़ी कोमलता से कहा- प्लीज समझो न . मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.लड़का कॉफ़ी के सिप इस तरह लेने लगा जैसे किसी अजनबी के साथ किसी मज़बूरी में बैठा है. लड़की ने टेबल के नीचे से उसके पाँव को अपने पाँव से छुआ. उसने पैर के अंगूठे से लड़के की जुराब को नीचे करना चाहा. लड़के ने अपनी टांग पीछे खीच ली . लड़की बोली- “चिढ़ते क्यों हो?”वे उठ गए.लड़की ने बाहर जाने के रास्ते के बीच रुक कर रेस्तरां के लड़के से पूछा- “वाशरूम किधर है?” फिर उसने कहा- "थोड़ी दूर वाशरूम तक मेरे साथ आओ." वे दोनों वहां पहुंचे तो थोड़ी सी तन्हाई में लड़की ने उसे खींचकर गले लगा लिया. सिक्के के इस दूसरे रुख में बेरुखी न थी. लड़के ने उसे और करीब लेकर इस तरह बाहों में जकड़ लिया जैसे वे किसी निजी कक्ष में अकेले हों.याद आईने के आ-पार खड़ी थी.उसके बालों में कुछ सफ़ेद बाल झांक रहे थे. वह अपने आपको देखने के लिए आईने के सामने खड़ा हुआ था कि अगर वह मिलने जायेगा तो कैसा दिखेगा. लेकिन उदास दिनों की शुरुआत के मादक दिन, पक्की याद की तरह उसके साथ खड़े थे.ये जो वे पति पत्नी हैं. ये जो दोनों के बीच का रिश्ता है. इसके बारे में वह किस तरह कह सकता है कि रिश्ता ठंडेपन से भर गया है. या बहुत पहले ही भर चुका था. अगर वह किसी से कहे कि उसकी बीवी दफ़्तर जाने से पहले घर के काम करती है. फिर उसके पास आती है. उसे अपने आलिंगन में बाँध लेती है. और फिर वे अपने निजी पलों से बाहर आते हैं. फिर वो दफ्तर जाती है. और कोई क्या कर सकता है किसी के लिए भी.वह सोचता है कि अगर वह किसी से कहे कि उन कुछ पलों के बाद अगले कुछ ही पलों में वह लड़की जो उसकी बीवी है, रोज़ तेज़ क़दम बाहर जाती दिखती है. वह जो रात से सुबह तक कहीं खोयी थी. दरवाजे के पास पहुँचते हुए कहती है- “अब तो खुश? यही चाहिए था न?”वह सोचता है सोफे पर धम्म से गिर जाये. वह गिर नहीं पाता. वह सोचता है कि ये सब वह कब चाहता था. ऐसा कब था कि यही चाहिए था? वह दरवाज़ा बंद करने नहीं जाता. उसे लगता है कि शायद वह एक बार वापस आएगी और उसे पूछेगी कि तुम दिन भर क्या करने वाले हो? वह खिड़की से देखता है. उसकी बीवी फोन कान से लगाये हुए तेज़ कदम बिल्डिंग के मुख्य दरवाज़े से बाहर निकल रही है.मास्टर बैडरूम की खिड़की में कबूतरों ने घोंसला बनाया है. उसे कोई रोज़ सुबह इसी खिड़की के पास देखे तो समझ सकता है कि वह कबूतरों को देख रहा है. उसे कबूतरों को देखना पसंद है. एक रोज़ वह कबूतरों को दाना डालने जायेगा अपनी बहुत सी तस्वीरें खिंचवायेगा. फिर उन तस्वीरों को फेसबुक पर पोस्ट कर देगा. उसे जानने वाले सब समझ सकेंगे कि वह कबूतरों से प्रेम करता है.[इंतज़ार की कहानियां उतनी उदास नहीं है जितना इंतज़ार]
Painting courtesy : Maris Renfro
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Published on February 29, 2016 22:19
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Kishore Chaudhary
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