बस एक बार के लिए

किताबों को सोचना अच्छा है। एक-दो किताब आस पास रहे तो एक अजाने संसार में प्रवेश किया जा सकता है। किताबें ऐसी खिड़कियाँ हैं, जो सबसे सुन्दर संसार में ले जाती हैं. 
आप सब किताबें नहीं पढ़ सकते। सबको पढ़ने की ज़रूरत भी नहीं है। आप इस दुनिया मे किताबें पढ़ने नहीं आये हैं। जैसे कोई कुम्हार केवल मृदा पात्र बनाने नहीं आता, लुहार लोहे की चीज़ें बनाने भर को नहीं आता। 
हमारे सम्मोहन होते हैं. हम प्यार करते हैं. हम प्यार करते हुए उसी को जीने लगते हैं. किताबें भी एक प्यार हो सकती हैं. जिसमें इस तरह डूब जाएँ कि हमें और कुछ न सूझे. लेकिन ये डूबना समय के किसी हिस्से के लिए हो सकता है. ये निरंतर होना असम्भव है. अगर संभव है तो फिर सचमुच कहीं कुछ गड़बड़ है. कि तुमने अन्य कलाओं, जीवित पौधों, सुन्दर पक्षियों, बहते पानी, ठहरी झीलों और जीवन के अनगिनत अचम्भों को खो दिया है. नृत्य के प्रेम में आकंठ डूबा एक नर्तक अर्धरात्रि को नाचने का मन होने पर नाच सकता है। द्रुत, अविराम और अनंत नृत्य। किन्तु वह बस एक बार के लिए हो सकता है। उसे फिर से लौट आना पड़ता है, उबाऊ, ढीले और बेस्वाद जीवन में।
जीवन के रास्ते में कुछ भी करते या न करते हुए अचानक भीड़ बढ़ जाती है। तब किसी अंडरपास से निकल जाना चाहिए। एक रोज़ अंडरपास को भी भीड़ शिथिल कर देगी। तब कोई और रास्ता देखना। किसी भी काम मे कभी देरी नहीं होती। ऐसा केवल हमें लगता है कि देर हो रही है। सबकुछ एक गति से चल रहा है। एक रोज़ छुएगा और आगे बढ़ जाएगा। कोई काम जो अधूरा दिखता है, वास्तव में उसका अधूरा होना ही उसकी पूर्णता है। कि वह बस इतना काम ही था।
जब भी कोई आस पास हो तो किताब एक तरफ रख देना। कि पास में बैठा व्यक्ति, जानवर या पक्षी दुनिया की किसी भी किताब से अद्भुत है। वह आपको इतना कुछ दे सकता है, जितना कई क़िताबें मिलकर शायद न दे पाए। 
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Published on November 05, 2017 21:03
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Kishore Chaudhary
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