अचम्भे की बरत की तरह



स्याही के लिबास में आई नृत्यांगना शैतान की प्रेमिका की निकली। उसके नाच से जो चिंगारी बहकी थी। उसने शैतान के दिल को रुई की तरह जला दिया। शैतान सब बन्धनों से दूर आक के डोडे से उड़ा फूल हो गया। उसे प्रेम, प्रेम और प्रेम सुनाई देने लगा।
शैतान ने चाहा कि वह उसे छू सके। वह उसे चूम ले। उसे बाहों में भर ले। अनयास मृत्यु को याद कर रहे व्यक्ति को कभी मृत्यु जिस तरह अपने आगोश में ले लेती है। उसी तरह नृत्यांगना ने अपनी बाहें खोल दी। शैतान एक अचम्भे की बरत की तरह गहराई में उतर गया।
जादुई टैंट में फैले पीले उजास में शैतान की प्रेमिका का रंग व्हिस्की जैसा हो गया था। सुनहरा रंग। शैतान अपनी प्रेमिका के रंग पर गिर रही हर स्याह लकीर को चूम कर मिटा देना चाहता था।
लेकिन शैतान को अपने पहले के सब प्रेम बेवक़्त याद आये। उसने अपने चाहने वालों से कहा कि इस लम्हे को रोक लो। दूजे सब प्रेम की तरह ये प्रेम कहीं खो न जाये। मित्रों ने तस्वीरें उतार लीं।
लेकिन मोहब्बत तो अपने दिल को चाक करना और सीने के कारोबार ही निकला। आज की शाम रेत के वे धोरे दूर रह गए हैं। शैतान की प्रेमिका जाने कहाँ होगी। उसकी याद में मगर प्याला भरा है।
चीयर्स।


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Published on November 20, 2017 02:36
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Kishore Chaudhary
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