चाकू को ही ज़िन्दगी न बना लें

यूजर्स की डेटा चोरी जैसी ख़बरों से हमको क्या फर्क पड़ता है? हम तो फेसबुक और व्हाट्स एप के विडिओ चैट में नंगे भी हो जाते हैं. डेटा हमारा आधार वालों के पास पड़ा ही है और लोग उसे चुरा ही रहे हैं. इसलिए ऐसी बेकार की ख़बरों से क्या सर लगाना.
लेकिन फिर भी अपने लिए टाइम निकालो.
छोटा भाई पुलिस में अधिकारी है. उसने सायबर क्राइम और लॉ की पढाई भी की हुई है. मुझे भाई ने कहा कि आपके इस नए फोन में एक एप डाउनलोड कर लो. व्हाट्स एप. एप के खुलते ही भाई ने मुझे इसके फ़ीचर समझाए. मुझे बड़ा अच्छा एप लगा लेकिन मैं जिनसे बात करना चाहता था उनमें से बहुत कम के पास एंड्राइड फोन थे. यहाँ तक कि आभा भी बेसिक मोबाइल ही उपयोग में ले रही थी. इसलिए उत्साह फीका पड़ गया. फिर मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं भाई-भाई फोन पर कभी खेला करेंगे. लेकिन दो साल के भीतर ही ऐसे बहुत कम दोस्त और परिचित बचे जिनके पास व्हाट्स एप चलाने लायक न फोन था.
कल व्हाट्स एप के संस्थापक सदस्य ब्रायन एक्शन ने अपने ट्विटर फोलोवर्स से कहा है कि फेसबुक को डिलीट करने का समय आ गया है. इसे डिलीट कर दिया जाये.
ब्रायन एक्शन ने जॉन काम के साथ व्हाट्स एप को बनाया था. साल दो हज़ार नौ में व्हाट्स एप शुरू किया गया था. उसी समय ब्रायन ने फेसबुक में नौकरी के लिए आवेदन किया मगर उनको रिजेक्ट कर दिया गया था. इस रिजेक्शन के बाद उन्होंने फ़रवरी में स्थापित की गयी कम्पनी व्हाट्स एप पर काम करना जारी रखा और मेहनत रंग लाई. व्हाट्स एप ने पूरी दुनिया में पाँव पसार लिए.
फेसबुक का मूल विचार था कि लोग अपनी तस्वीरें एक जगह रखें. उनको अपने मित्रों को दिखा सकें. दूसरे मित्रों के पास रखी तस्वीरों में खुद को खोज सकें. स्कूल और कॉलेज में बिछड़ गए दोस्तों से तस्वीरों के माध्यम से पुनः जुड़ सकें. लेकिन कम्युनिकेशन आदमी का सबसे बड़ा लालच होता है. इसी ने फेसबुक को हर सामाजिक गतिविधि की सूचना और आन्दोलन बना दिया. इसे अंधे के हाथ बटेर लगना कहा जाता है.
व्हाट्स एप जब बना तो उसमें बहुत सारी समस्याएं थी. जैसे कि वह हैंग हो जाता और पूरी तरह बंद हो जाता था. कुछ एक महीने इस पर काम किया लेकिन बात नहीं बनी. ये कम्पनी और प्रोजेक्ट बंद होने को ही था. इससे दोनों मित्रों को कोई आशा नहीं था. एप्पल ने जब पुश नोटिफिकेशन को एप्स के लिए काम लेना शुरू किया तो याहू छोड़कर आये दोनों दोस्तों ने पुश नोटिफिकेशन का इस्तेमाल व्हाट्स एप में किया.
पुश नोटिफिकेशन का अर्थ है हरकारे की आवाज़. आप इसे ऐसे समझिये कि किसी ने ऊँची जगह पर पर चढ़कर ज़ोर से एक आवाज़ लगाई. आपको वह आवाज़ सुनने में रूचि नहीं है लेकिन आवाज़ दीवारों के भीतर तक आ जाती है. एक सूचना निश्चित दायरे तक पहुँच जाती है. आपने अगर दो हज़ार आठ नौ के आस पास वाले नोकिया के स्मार्ट फोन यूज किये हैं तो आपको सहज ही याद आएगा कि वहां पुश नोटिफिकेशन को ऑन और ऑफ़ करने का एक ऑप्शन था. हमें इसकी ज़रूरत न थी इसलिए हमने इसे समझा नहीं.
मैं तकनीक का विद्यार्थी नहीं हूँ. मैं सहज जितना समझ सकता हूँ उतना समझता हूँ और अपने सबक को लिख देता हूँ. तो उस समय मैंने जानना चाहा कि पुश नोटिफिकेशन को ऑन या ऑफ़ करने से कोई मेरे फोन में कोई बदलाव आता है? नहीं आता था. इसलिए कि टेलिकॉम कम्पनियों पर विज्ञापन करने की पाबंदी रही होगी. तब तक ऐसे एप नहीं आये थे जिनको पीछे से कोई सूचना दे और वे फोन के स्क्रीन पर उसे फ़्लैश कर सकें.
व्हाट्स एप कम्पनी एक डूबा हुआ श्रम और धन था. लगभग कुछ दिन में बंद हो जाने वाला कारखाना. अचानक पुश नोटिफिकेशन पर आधारित एक फीचर इंट्रोड्यूस किया गया. व्हाट्स एप का यूजर अपने स्टेट्स में कुछ भी लिखे या बदलाव करे तो उस यूजर से जुड़े हुए सभी यूजर को वह सूचना तुरंत मिल जाये. बस इसी एक बात से बात बन गयी. महीने दो महीने में इसके ढाल लाख यूजर बन गए. इसलिए कि हर किसी को ये जानना था कि उसके प्रिय, पड़ोसी , मित्र, सहकर्मी का स्टेट्स कैसा है. उसके आस-पास नया क्या चल रहा है. ये एक तरह से ख़ुद को ब्रॉडकास्ट करना और दूजों की कही गयी बात को बिना किसी को बताये पढ़ना हो गया.
बस बात बन गयी. व्हाट्स एप बिलियन यूजर कम्पनी हो गयी.
लेकिन फेसबुक को पसीना आ गया. इसलिए कि दोनों संचार का ही काम कर रहे थे. कम्युनिकेशन की एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकती थी. या शेर जिस तरह चीतों को मार देते हैं उसी तरह व्हाट्स एप का शिकार फेसबुक ने कर लिया. साल दो हज़ार चौदह में फेसबुक ने इसका अधिग्रहण कर लिया. अब व्हाट्स एप के दो संस्थापकों में से एक जॉन फेसबुक के बोर्ड में हैं और दूजे ब्रायन फेसबुक डिलीट करने का कह रहे हैं.
मेरे बहुत सारे दोस्त इस बात से परेशान रहते कि व्हाट्स एप का सादा होना कितना अच्छा था. अब स्टोरीज का स्नेपचैट जैसा फीचर, ग्रुप को छोड़े बिना डिलीट न कर पाने का ऑप्शन, पेमेंट के फीचर और भी जाने क्या-क्या बोझ से भर दिया गया है. मैं उनसे कहता कि ये तो दिखने भर वाली चीज़ें हैं. असल में आपके जीवन का सारा हिसाब किताब ही इक्कठा किया जा रहा है. इसे कोड में बदलकर सहेजा जा रहा है. इसका एक रोज़ उपयोग भी किया जायेगा. इसको लाइव ट्रांसमिशन की तरह किसी भी तीसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराया जायेगा. आप समझेंगे हम बात कर रहे हैं. लेकिन हो सकता है उसी बातचीत को अनेक लोग किसी उद्धेश्य से सजीव पढ़, सुन और देख रहे होंगे.
ब्रायन का कहना है कि फेसबुक मालिकों ने अपने ही घर में चोर बिठा लिए हैं. उन चोरों से सांठ गांठ कर ली है. केम्ब्रिज एनालिटिक नामक एक कम्पनी ने फेसबुक यूजर्स का डेटा चुराया और उसे राजनितिक काम करने वालों को बेच दिया. ऐसा करके अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव को प्रभावित किया गया. ब्रायन की चिंता ये है कि डेटा चोरी से समाज और राजनीति को गलत ढंग से प्रभावित किया जा रहा है.
जैसे बीमारी से डरने वाले लोगों की सूची बना ली जाये. उन्हीं डरे हुए लोगों को एक मिस्लीड करने वाली अधूरी इन्फोर्मेशन दी जाये. तो वे उसका भयानक प्रचार करेंगे. उसकी रोकथाम के लिए दवाएं खरीदेंगे. उनके लिए एक ख़बर ही ज़िन्दगी होकर रह जाएगी. समाज में एक वर्ग हताश और परेशान होकर अपनी आर्थिक उत्पादकता और मानसिक स्थिरता को गलत जगह इन्वेस्ट करेगा.
आज का सबसे बड़ा नशा हेरोइन एक समय बाज़ार में मेडिकल कम्पनी ने दर्दनिवारक दवा के रूप में लांच किया था. उसके प्रचार ने कुछ दिनों में ही समाज को एक भयानक नशे में धकेल दिया था. इस दवा को बाज़ार से हटा लिया गया. इसका निर्माण कम्पनी ने बंद कर दिया लेकिन दुनिया भर में होने लगा. अफ़ीम की खेती से देश चलने लगे. आतंकवादियों को धन मिलने लगा. आख़िरकार एक ख़ूबसूरत और प्रगतिशील देश अफगानिस्तान को तबाह होकर कीमत चुकानी पड़ी. इसी तरह अफ़्रीकी देशों में नशे की गोलियों ने समाज को गर्त में पहुँच दिया. ये दोनों उदाहरण समाज की भेड़चाल और अज्ञानता के तीव्र प्रसार का परिमाण हैं.
तो फेसबुक की हरकतें अच्छी नहीं है. वह आपको, आपके परिवार को, समाज को और देश को एक दिन छोटे से लालच के कारण किसी ऐसी ही आफत में धकेल देगा. डेटा चोरी से ऐसे समूह बनाये जा सकेंगे जो तेज़ी से जातीय, सांप्रदायिक, क्षेत्रीय और हर तरह के वर्ग के बीच ज़हर बो सकेंगे. ये स्व प्रेरित समूह राजनितिक इशारों पर काम करेंगे और कुर्सी के लिए, प्रभुत्व के लिए और समाज को बाँट देने के लिए कुछ भी कर सकेंगे. ये समूह हमारे बच्चों की पीढ़ी को किसी मनोरोग में धेकेल देंगे.
फेसबुक अब भी अपनी ख़ुद की वैश्विक इंटरनेट सेवा पर काम कर रहा है. इसे बंद किये जाने का समाचार नहीं है. फेसबुक ऐसी तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे फोन में फेसबुक चलाने के लिए इंटरनेट प्रोवाइड करने वाली कम्पनी पर आश्रित न रहना पड़े. इससे फेसबुक विज्ञापन बाज़ार की प्रतिस्पर्धा को समाप्त करना चाहता है. वह अपने यूजर्स को केवल अपने विज्ञापन दिखायेगा. पैसे लेकर गढ़ी हुई भ्रामक और असत्य सूचनाओं का कारोबार भी होगा. आपसे कहेगा कि फेसबुक यूज करना है तो देखना ही पड़ेगा.
आप कहाँ जायेंगे? आज फेसबुक हेरोइन से भी बड़ा नशा है.
एक दोस्त ने मुझसे पूछा कि अगर फेसबुक और व्हाट्स एप ऐसे गंदे वाले विडियो चैट को पब्लिक कर दे तो? मैंने हसंते हुए कहा- "वे ऐसा नहीं करेंगे." उसने पूछा- "क्यों?" मैंने कहा- "देहिक क्रियाओं से जुड़ी वर्जनाएं रुढ़िवादी समाजों में ही ज़्यादा है. उन लोगों को अभी इस बात का शायद आईडिया नहीं है कि भारत जैसे देशों के नागरिकों को ऐसे विडियो के माध्यम से ब्लैक मेल किया जा सके. इससे भी बड़ी बात है कि अभी उनके पास और बहुत सारे काम हैं. जिस दिन फेसबुक दिवालिया होने लगेगी तब कोई भारतीय ही उनको ये सलाह देगा कि पुरानी बही से वसूली शुरू करो."
आपका व्हाट्स एप कहीं और से भी लॉग इन है और ये कोई चोरी नहीं है, ये कहकर कम्पनी अपना पल्ला झाड़ सकती है. इसलिए कि वेब ब्राउजर से लॉग इन करते समय आपको कंपनी द्वारा मैसेज किया गया था. आपने उसे पढ़ा और डाला तभी ये सम्भव हुआ है. एक एसएमएस तो हम कहीं से भी हैक कर सकते हैं. ये बहुत कठिन नहीं है.
एक तरीका है कुछ रुपयों का भुगतान करके आप किसी भी नम्बर पर किसी भी नम्बर से काल कर सकते हैं. आप जो नम्बर चाहेंगे वही रिसीव करने वाले को दिखेगा.
बच्चू तुम कहाँ-कहाँ फंसे हुए हो अभी जानते नहीं हो.
पोस्ट स्क्रिप्ट :
आपके पास चाकू है तो हाथ कट जाने के डर से या आवेश में किसी की हत्या हो जाने के डर से उसे फेंकिए मत। उसे संभाल कर उपयोग में लेना और सुरक्षित रखना सीखें।
क्या न करें- फेसबुक की प्रश्नोत्तरी में भाग न लें। पोल से बचें। छवियों पर भरोसा कर अग्रेषित या प्रकाशित न करें। किसी भी न्यूज़ पोर्टल की ख़बर तो तुरंत सच न मानें। स्वयं को याद दिलाते रहें कि इंटरनेट पर झूठ बहुतायत में उपलब्ध है।
क्या करें- सोच समझकर, शांत मन से, बिना किसी आग्रह के अपने आपको अभिव्यक्त करें। अपने जातीय, धार्मिक और वैचारिक मूल्यों को निजी जीवन में महत्व दें दूसरों पर न थोपें। सामाजिक व्याधियों पर सक्रिय विरोध करें। अपने पक्ष को पोस्ट में साफ़-साफ़ लिखने का कष्ट उठायें और असहमति होने पर बहस करने को स्थगित रखें। इसलिए कि बहस करने वाले आपके दोस्त कम और प्रचारक ज़्यादा होते हैं। सामाजिक, राजनितिक चेतना और आर्थिक सुरक्षा के विषयों पर बात करें लेकिन शेयर करने का मन हो तो उसे कई-कई बार जाँच लें कि सत्यता क्या है? समस्याओं के सही समाधान भी सुझाएँ। देश के लोकतांत्रिक ढांचे में चुनाव का अधिकार है, इसलिए राजनेताओं को अपमानित करने वाली पोस्ट लिखने की जगह चुनाव में अपने मत का प्रयोग करें।
सबसे अंत में ख़ुद को कहें कि थोड़ी शर्म रखें, थोड़ा सा तो तमीज़ से बोलें और चाकू से काम लें मगर चाकू को ही ज़िन्दगी न बना लें.
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Published on March 20, 2018 21:03
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Kishore Chaudhary
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