पीले पन्नों के झड़ जाने से पहले
एक बन्द डायरी थी। उसे किसी को पढ़ाना नहीं था। वह केवल लिख देना भर था कि लिखने से मन थोड़ा सा मुक्त हो जाता। एक बार का ऐसा लगता कि एड़ी से कोई कांटा निकालकर दूर फेंक दिया है।
अब इस डायरी को सहेजना भी एक काम हो गया और फिर इन कांटों का किसी से सीधा वास्ता न रहा। उस पर ये पीले पड़ते पन्ने जाने कब फट जाएं, जाने कब स्याही के अक्षर धुल जाएं। इसलिए तुम भी पढ़ लो कि हो सकता है कोई बात तुम्हारे काम की निकले। तुमको भी ऐसे ही किसी की याद आए और ये सोचकर मुस्कुरा सको कि तुमने जो जीया है, वैसा और भी लोग जीते हैं।
26 March 2013 ·
वह एक नया रिश्ता बनाते हुए इस सोच में गुम रहता है कि पुराने रिश्ते उघड़ तो नहीं रहे।
24 May ·2013
हम अपनी कांटेक्ट लिस्ट में दानों से भरी बालियाँ जमा करते जाते हैं लेकिन चुपके से सारे दाने कहीं चले जाते हैं और भूसा बचा रह जाता है.
17 July 2013 ·
टीन की छतें बरसात में बादलों का तबला हो जाती हैं। जैसे किसी पुरानी याद में हम खाली कासा हो जाते हैं। बांसुरी की आवाज़ से भरा हुआ एक खाली कासा।
3 November 2014 ·
पेड़ों के पत्ते चुप हैं। पंछी दृश्य की परिधि से गायब हैं। ऐसी ही थी वह दोपहर जब मुझे लौट जाना था।
तुम इस दोपहर में इसी समय खूब याद हो।
10 February 2015·
टूटने से पहले प्याला कई बार भरता और खाली होता है। कुछ एक ही बदनसीब होते हैं जो पहले प्यार में चटक जाते हैं।
21 June 2015 ·
रास्ते हमेशा के लिए नहीं होते। कभी बारिशें, कभी आंधियां रोक लेती हैं।
28 November 2015 ·
पत्ते बारिशों के जाते ही सूख जायेंगे मगर मन का जाने क्या होगा।
21 May 2016 ·
वहम एक यही तकलीफ भरा था कि दिल सोचता था तुम किसी के तो हो।।
15 July 2016 ·
मेरे पास जो कुछ बचा हुआ है। वह तुम्हारे फरेब उधेड़ता है।
11 August 2016 ·
उद्विग्न सांसें, उत्तेजन पूर्ण आलोड़न, भुजाओं के कसाव, लयबद्ध देह प्रवाह और प्रश्नपूर्ण नयन।
तुम्हारे लिए ये कोई एक और के साथ होने का परीक्षण मात्र था।
19 October 2016 ·
वनलता अपनी ही किसी भाषा में खिली है। तुम वहां अपना नाम न खोजना।
23 December 2016 ·
ये हरापन देख रहे हो?
सोचो अब तक कहाँ छुपा था। मिट्टी में था। नमी में था। बारिश में था। हवा में था। या फिर अचानक आई धूप की कड़ी चुभन में था।
दूर तक हरीतिमा। लेकिन कल तक आँखे पीले धूसर उजाड़ से थक गयी थीं। एक ही गंध उड़ती रहती थी। सूनेपन और तन्हाई की गंध। एक ही उजास था, नंगा उजास।
सुनो, तुम उदास न होना।
मगर कहो तो ये हरापन कब तक रहेगा?
16 January 2017
बाहर दीवारों पर
फूल और बेलें मांड रखी थी।
भीतर एक कंटीला उजाड़ फैला था।
रास्ता कभी बन्द नहीं करना चाहिए।
19 April 2017 ·
कह दिया होता
कि बदन एक उपकरण है
प्रेम मगर तुमसे है।
बहुत सी चीज़ें बची रहती।
3 June 2017 ·
बारिशें न हों तो भी
तुम्हारा एक ख़याल काफी है भीगने को.
11 September 2017 ·
तुम अपनी धूप लिए रहना
मैं अपना इंतज़ार रखूं.
सीले मौसम में भी एक रोज़ ढल जाती है ज़िन्दगी.
20 October 2017 ·
वो दुःख तुम्हारा कभी पीछा न छोड़ेगा। जो तुम्हारे लालच से जन्मा है।
लालच ख़त्म हो जाने के बाद भी।
25 November 2017 ·
लम्बे समय बाद कभी-कभी पुराना ग्राहक लौट आता.दुःख सबसे अच्छे ग्राहक हैं। वे कभी पेढ़ी को खाली नहीं रहने देते।
शुक्रिया।
Published on July 24, 2018 20:14
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