जयपुर में एक दीवार पर स्वप्ना बर्मन
रेलवे स्टेशन के आगे गांधी जी जयपुरी पगड़ी पहने खड़े थे। मैं डिस्प्ले में देखने लगा कि गुवाहाटी एक्सप्रेस कितनी देर में आएगी। दस मिनट बाकी थे।
आठ बजे आभा ने उठाया। मैं बिना मुंह धोए, रात जो कपड़े पहनकर सोया था, उन्हीं में रेलवे स्टेशन चल पड़ा। "आप ऐसे ही जायेंगे?" मैंने कहा- "मुझे जयपुर में कौन जानता है?"
स्टेशन से बाहर आते ही मैंने दुष्यंत को कहा- "जयपुरी पगड़ी में गांधी जी का फ़ोटो तो बनता है" दुशु ने कहा- "मैं नहीं ले रहा" मैंने कहा- "सोचो गांधी जी भी बहुरूपिये होते तो कैसा होता। कभी सरदार पटेल बन जाते, कभी नेताजी सुभाष बन जाते, कभी गोरों जैसे सूट बूट पहन लेते, कभी आदिवासी बनकर परिंदों के पंखों वाली टोपियां पहन लेते तो?"
दुशु ने कहा- "आपको कैब मिली?"
कैब वाले चार सौ रुपये मांग रहे थे। डेढ़ गुना पैसा लगेगा। अभी ट्रैफिक ज़्यादा है। हम पैदल चलते हुए जयपुर मेट्रो तक आ गए। वहां भी बहुत भीड़ थी। कोई पचास एक बंदर तो अंदर भी न जा सके थे। वे मेट्रो एंट्रेंस की दीवार पर ही इंतज़ार कर रहे थे।
फिर सवा तीन सौ में ओला वाला मान गया। ओला का इंतज़ार करते हुए मुझे स्वप्ना बर्मन दिखी। मैंने कहा- "दुशु जल्दी से हम दोनों का फ़ोटो लो।" फ़ोटो लेते समय एक व्यक्ति रुक कर देखने लगे। उन्होंने दुशु के पीछे खड़े हुए मुझसे पूछा- "आप किशोर जी..."
मैंने कहा- "हाँ"
"मैं प्रेम हूँ। इनकम टैक्स में जॉब करता हूँ। आपको देखते ही पहचान लिया था..." इसके आगे बहुत सारी ऐसी बातें थी जिनको सुनकर मैं प्रसन्न हो गया। फ़ोन नम्बर एक्सचेंज करते समय मैंने उनको कहा- "मुझे जीवन में प्रेम ही प्रेम मिला है। हम दोनों अगली बार इत्मीनान से मिलेंगे।"
भारतीय डाक विभाग को लव यू है ❤
पोस्ट स्क्रिप्ट :
सुबह स्वप्ना बर्मन के सम्मान में बनी ख़ूबसूरत वाल पेंटिंग के साथ तस्वीर खिंचवाना एक तरह से अपनी एथलीट को सम्मान देना ही था।
ये तस्वीर जयपुर रेलवे स्टेशन पर भारतीय डाक विभाग कार्यालय के मुख्यद्वार के पास बनी थी तो सोचा कि ये डाक विभाग का काम है। बाद में शिप्रा जी ने असल क्रेडिट्स तक पहुंचाया।
Contree Rohit Agarwal Isha Surolia Tandon
जिस पेंटिंग के साथ तस्वीर लेने का मन हुआ वह ईशा सुरोलिया टंडन ने बनाई है। एक और बार आप सबको बहुत सारा प्यार। आप से आने वाली पीढ़ी सीखेगी। नया सुंदर कार्य करेगी। हमारा देश स्वच्छ और सुंदर होगा। ❤
आठ बजे आभा ने उठाया। मैं बिना मुंह धोए, रात जो कपड़े पहनकर सोया था, उन्हीं में रेलवे स्टेशन चल पड़ा। "आप ऐसे ही जायेंगे?" मैंने कहा- "मुझे जयपुर में कौन जानता है?"
स्टेशन से बाहर आते ही मैंने दुष्यंत को कहा- "जयपुरी पगड़ी में गांधी जी का फ़ोटो तो बनता है" दुशु ने कहा- "मैं नहीं ले रहा" मैंने कहा- "सोचो गांधी जी भी बहुरूपिये होते तो कैसा होता। कभी सरदार पटेल बन जाते, कभी नेताजी सुभाष बन जाते, कभी गोरों जैसे सूट बूट पहन लेते, कभी आदिवासी बनकर परिंदों के पंखों वाली टोपियां पहन लेते तो?"
दुशु ने कहा- "आपको कैब मिली?"
कैब वाले चार सौ रुपये मांग रहे थे। डेढ़ गुना पैसा लगेगा। अभी ट्रैफिक ज़्यादा है। हम पैदल चलते हुए जयपुर मेट्रो तक आ गए। वहां भी बहुत भीड़ थी। कोई पचास एक बंदर तो अंदर भी न जा सके थे। वे मेट्रो एंट्रेंस की दीवार पर ही इंतज़ार कर रहे थे।
फिर सवा तीन सौ में ओला वाला मान गया। ओला का इंतज़ार करते हुए मुझे स्वप्ना बर्मन दिखी। मैंने कहा- "दुशु जल्दी से हम दोनों का फ़ोटो लो।" फ़ोटो लेते समय एक व्यक्ति रुक कर देखने लगे। उन्होंने दुशु के पीछे खड़े हुए मुझसे पूछा- "आप किशोर जी..."
मैंने कहा- "हाँ"
"मैं प्रेम हूँ। इनकम टैक्स में जॉब करता हूँ। आपको देखते ही पहचान लिया था..." इसके आगे बहुत सारी ऐसी बातें थी जिनको सुनकर मैं प्रसन्न हो गया। फ़ोन नम्बर एक्सचेंज करते समय मैंने उनको कहा- "मुझे जीवन में प्रेम ही प्रेम मिला है। हम दोनों अगली बार इत्मीनान से मिलेंगे।"
भारतीय डाक विभाग को लव यू है ❤
पोस्ट स्क्रिप्ट :
सुबह स्वप्ना बर्मन के सम्मान में बनी ख़ूबसूरत वाल पेंटिंग के साथ तस्वीर खिंचवाना एक तरह से अपनी एथलीट को सम्मान देना ही था।
ये तस्वीर जयपुर रेलवे स्टेशन पर भारतीय डाक विभाग कार्यालय के मुख्यद्वार के पास बनी थी तो सोचा कि ये डाक विभाग का काम है। बाद में शिप्रा जी ने असल क्रेडिट्स तक पहुंचाया।
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जिस पेंटिंग के साथ तस्वीर लेने का मन हुआ वह ईशा सुरोलिया टंडन ने बनाई है। एक और बार आप सबको बहुत सारा प्यार। आप से आने वाली पीढ़ी सीखेगी। नया सुंदर कार्य करेगी। हमारा देश स्वच्छ और सुंदर होगा। ❤
Published on November 19, 2018 08:28
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