कभी-कभी
पीड़ा को, हताशा को,
दुख भरे आंसुओं को
बरबाद मोहब्बत को
नष्ट हो चुके सम्बंध को
न भरे जा सकने वाले नुकसान को
माफ करने का मन हो जाता है।
कि शैतान नहीं झाँकता पीछे
वह फिसलता रहता है वक़्त के रेले में
शैतान की प्रेमिका की आँखें खोजता हुआ।
* * *
और कुछ नहीं।
Published on March 07, 2020 18:46