Belial / बेलियल
स्पाईवर्स की दुनिया और ‘बेलियल’ का रहस्य
जासूसी कहानियों की दुनिया में अक्सर हम एक ही सुपर-स्पाई को केंद्र में देखते आए हैं—वही चेहरा, वही नाम, और वही हर बार दुनिया बचाने का जिम्मा। लेकिन स्पाईवर्स सीरीज़ इस तयशुदा ढांचे से थोड़ा हटकर खड़ी होती है। यहां कहानी किसी एक किरदार के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि एक पूरी स्पाई एजेंसी के आसपास आकार लेती है—एक ऐसा सिस्टम, जो भीतर से जितना संगठित है, बाहर से उतना ही अदृश्य।
इस सीरीज़ का केंद्र है ‘इंद्रप्रस्थ इंटेलिजेंसिया’—एक अघोषित, अतिरिक्त डेस्क, जिसे ‘रॉ’ के समानांतर काम करता हुआ परिभाषित किया गया है। इस एजेंसी के भीतर एक स्पेशल एजेंट्स प्रोग्राम चलता है, जहां एजेंट्स को असंभव से दिखने वाले मिशनों के लिए तैयार किया जाता है। यही एजेंसी, यही नेटवर्क, और यही एजेंट्स—हर किताब में किसी नए संकट से टकराते हैं।
पाँचवीं कड़ी: बेलियल
‘कोड ब्लैक पर्ल’, ‘मिशन ओसावा’, ‘द अफ़गान हाउंड’ और ‘ऑपरेशन साल्ज़र’ के बाद ‘बेलियल’ स्पाईवर्स सीरीज़ की पाँचवीं कहानी है।
जहाँ शुरुआती किताबों में सीरीज़ के सभी मुख्य एजेंट्स की परिचयात्मक कहानियाँ थीं, वहीं अब कहानी उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहाँ किरदार दोहराए जाते हैं—लेकिन हालात हर बार नए और ज्यादा खतरनाक होते हैं।
‘बेलियल’ में एक बार फिर सामने आते हैं आरव और रोज़ीना। इस बार उन्हें सौंपा जाता है एक ऐसा मिशन, जिसका नाम तो है—लेकिन कोई साफ़ रूपरेखा नहीं।
जब मिशन की शक्ल ही साफ़ न हो
दिल्ली से शुरू होकर उत्तरी कश्मीर तक फैली कुछ घटनाएँ।
कुछ अधूरी जानकारियाँ।
कुछ ऐसे सुराग, जो आपस में जुड़ने से इनकार करते हैं।
आरव और रोज़ीना के पास जो है, वह एक पूरी तस्वीर नहीं—बस बिखरे हुए टुकड़े हैं। इतना जरूर साफ़ है कि इस पूरे खेल के पीछे इंटरनेशनल क्रिमिनल ऑर्गनाइज़ेशन एमसाना शामिल है। लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—
उनका मकसद क्या है?
क्यों दिल्ली से लेकर गुरेज़ वैली तक घटनाओं का एक जाल बुना गया है?
गैराल: खतरे का नया चेहरा
‘बेलियल’ के साथ पहली बार सामने आता है गैराल—एमसाना के टॉप बॉसेज़ में से एक।
एक अजीब, असहज और खतरनाक किरदार।
औरतों को छेड़ना, उनके साथ अश्लील हरकतें करना, और फिर उनके हाथों पिटना—यह सब उसके लिए किसी नशे से कम नहीं।
इसी विकृत व्यवहार के चलते उसकी पहचान उजागर होती है।
लेकिन गैराल सिर्फ़ एक सनकी विलेन नहीं है—वह उस बड़े रहस्य की एक कड़ी है, जिसकी जड़ें कश्मीर में कहीं गहराई तक फैली हुई हैं।
कश्मीर का अनकहा सच
आख़िर कश्मीर में ऐसा क्या है, जिसकी तलाश में एमसाना का एक टॉप बॉस खुद मैदान में उतर आता है?
क्या है वह चीज़, जिसके लिए दिल्ली से गुरेज़ वैली तक मौत, भ्रम और धोखे का एक सुनियोजित जाल बिछाया गया?
और सबसे अहम सवाल—
क्या आरव और रोज़ीना इस पूरी तस्वीर को समझ पाने से पहले ही उसका हिस्सा बन जाएंगे?
‘बेलियल’ सिर्फ़ एक जासूसी कहानी नहीं है।
यह एक ऐसे मिशन की दास्तान है, जिसका नाम जितना रहस्यमय है, उसकी परतें उतनी ही खतरनाक।
स्पाईवर्स की दुनिया में यह कहानी उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ हर जवाब के साथ नए सवाल जन्म लेते हैं।
अगर आप जासूसी साहित्य में सिर्फ़ एक हीरो नहीं, बल्कि एक पूरी खुफ़िया मशीनरी को काम करते देखना चाहते हैं—तो ‘बेलियल’ आपकी पढ़ने की सूची में होना चाहिए।
जासूसी कहानियों की दुनिया में अक्सर हम एक ही सुपर-स्पाई को केंद्र में देखते आए हैं—वही चेहरा, वही नाम, और वही हर बार दुनिया बचाने का जिम्मा। लेकिन स्पाईवर्स सीरीज़ इस तयशुदा ढांचे से थोड़ा हटकर खड़ी होती है। यहां कहानी किसी एक किरदार के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि एक पूरी स्पाई एजेंसी के आसपास आकार लेती है—एक ऐसा सिस्टम, जो भीतर से जितना संगठित है, बाहर से उतना ही अदृश्य।
इस सीरीज़ का केंद्र है ‘इंद्रप्रस्थ इंटेलिजेंसिया’—एक अघोषित, अतिरिक्त डेस्क, जिसे ‘रॉ’ के समानांतर काम करता हुआ परिभाषित किया गया है। इस एजेंसी के भीतर एक स्पेशल एजेंट्स प्रोग्राम चलता है, जहां एजेंट्स को असंभव से दिखने वाले मिशनों के लिए तैयार किया जाता है। यही एजेंसी, यही नेटवर्क, और यही एजेंट्स—हर किताब में किसी नए संकट से टकराते हैं।
पाँचवीं कड़ी: बेलियल
‘कोड ब्लैक पर्ल’, ‘मिशन ओसावा’, ‘द अफ़गान हाउंड’ और ‘ऑपरेशन साल्ज़र’ के बाद ‘बेलियल’ स्पाईवर्स सीरीज़ की पाँचवीं कहानी है।
जहाँ शुरुआती किताबों में सीरीज़ के सभी मुख्य एजेंट्स की परिचयात्मक कहानियाँ थीं, वहीं अब कहानी उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहाँ किरदार दोहराए जाते हैं—लेकिन हालात हर बार नए और ज्यादा खतरनाक होते हैं।
‘बेलियल’ में एक बार फिर सामने आते हैं आरव और रोज़ीना। इस बार उन्हें सौंपा जाता है एक ऐसा मिशन, जिसका नाम तो है—लेकिन कोई साफ़ रूपरेखा नहीं।
जब मिशन की शक्ल ही साफ़ न हो
दिल्ली से शुरू होकर उत्तरी कश्मीर तक फैली कुछ घटनाएँ।
कुछ अधूरी जानकारियाँ।
कुछ ऐसे सुराग, जो आपस में जुड़ने से इनकार करते हैं।
आरव और रोज़ीना के पास जो है, वह एक पूरी तस्वीर नहीं—बस बिखरे हुए टुकड़े हैं। इतना जरूर साफ़ है कि इस पूरे खेल के पीछे इंटरनेशनल क्रिमिनल ऑर्गनाइज़ेशन एमसाना शामिल है। लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—
उनका मकसद क्या है?
क्यों दिल्ली से लेकर गुरेज़ वैली तक घटनाओं का एक जाल बुना गया है?
गैराल: खतरे का नया चेहरा
‘बेलियल’ के साथ पहली बार सामने आता है गैराल—एमसाना के टॉप बॉसेज़ में से एक।
एक अजीब, असहज और खतरनाक किरदार।
औरतों को छेड़ना, उनके साथ अश्लील हरकतें करना, और फिर उनके हाथों पिटना—यह सब उसके लिए किसी नशे से कम नहीं।
इसी विकृत व्यवहार के चलते उसकी पहचान उजागर होती है।
लेकिन गैराल सिर्फ़ एक सनकी विलेन नहीं है—वह उस बड़े रहस्य की एक कड़ी है, जिसकी जड़ें कश्मीर में कहीं गहराई तक फैली हुई हैं।
कश्मीर का अनकहा सच
आख़िर कश्मीर में ऐसा क्या है, जिसकी तलाश में एमसाना का एक टॉप बॉस खुद मैदान में उतर आता है?
क्या है वह चीज़, जिसके लिए दिल्ली से गुरेज़ वैली तक मौत, भ्रम और धोखे का एक सुनियोजित जाल बिछाया गया?
और सबसे अहम सवाल—
क्या आरव और रोज़ीना इस पूरी तस्वीर को समझ पाने से पहले ही उसका हिस्सा बन जाएंगे?
‘बेलियल’ सिर्फ़ एक जासूसी कहानी नहीं है।
यह एक ऐसे मिशन की दास्तान है, जिसका नाम जितना रहस्यमय है, उसकी परतें उतनी ही खतरनाक।
स्पाईवर्स की दुनिया में यह कहानी उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ हर जवाब के साथ नए सवाल जन्म लेते हैं।
अगर आप जासूसी साहित्य में सिर्फ़ एक हीरो नहीं, बल्कि एक पूरी खुफ़िया मशीनरी को काम करते देखना चाहते हैं—तो ‘बेलियल’ आपकी पढ़ने की सूची में होना चाहिए।
Published on January 23, 2026 17:44
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Lafztarash
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