क्या आप अपने बच्चे से ये 5 ज़रूरी बातें करते हैं?
जिन बातों पर हम अपने बच्चों से कभी बात नहीं करते,
हम अपने बच्चों से पढ़ाई के बारे में पूछते हैं।
होमवर्क के बारे में पूछते हैं।
अंक, परीक्षा और भविष्य के बारे में पूछते हैं।
लेकिन क्या हम कभी उनसे यह पूछते हैं - "आज तुम्हारा मन कैसा है?"
कई बार बच्चे अपनी सबसे बड़ी लड़ाई चुपचाप लड़ रहे होते हैं। वे डरते हैं कि उन्हें गलत समझा जाएगा, डाँट दिया जाएगा या उनकी भावनाओं को कमज़ोरी मान लिया जाएगा। इसलिए वे चुप रहना सीख जाते हैं।
समस्या यह नहीं कि बच्चे बोलना नहीं चाहते।
समस्या यह है कि उन्हें हमेशा यह भरोसा नहीं होता कि कोई बिना निर्णय दिए उन्हें सुनेगा।
एक बातचीत किसी बच्चे की दिशा बदल सकती है। कभी-कभी एक सवाल - "क्या तुम ठीक हो?" किसी लंबे मौन को तोड़ सकता है।
माता-पिता होने का अर्थ केवल बच्चों का भविष्य बनाना नहीं है; उनके वर्तमान को समझना भी है। बच्चों को सलाह देने से पहले उन्हें सुनना ज़्यादा ज़रूरी है।
मेरे लिए लेखन केवल कहानियाँ लिखना नहीं है। यह उन अनकही भावनाओं को आवाज़ देना है, जो अक्सर घरों की चारदीवारी के भीतर दब जाती हैं।
यदि आज इस लेख को पढ़ने के बाद आप अपने बच्चे, छोटे भाई-बहन या किसी किशोर से पाँच मिनट खुलकर बात करते हैं, तो शायद यह लेख अपना उद्देश्य पूरा कर चुका होगा।
क्योंकि कई बार ज़िंदगी बदलने के लिए बड़े भाषण नहीं, केवल एक सच्ची बातचीत काफ़ी होती है।
- अमित उत्थान (Amit Utthaan), उपन्यासकार , लेखक - WAR OF BREATH: सांसों की जंग & WAR OF BREATH: A Story of Silence, Pressure and Hope
हम अपने बच्चों से पढ़ाई के बारे में पूछते हैं।
होमवर्क के बारे में पूछते हैं।
अंक, परीक्षा और भविष्य के बारे में पूछते हैं।
लेकिन क्या हम कभी उनसे यह पूछते हैं - "आज तुम्हारा मन कैसा है?"
कई बार बच्चे अपनी सबसे बड़ी लड़ाई चुपचाप लड़ रहे होते हैं। वे डरते हैं कि उन्हें गलत समझा जाएगा, डाँट दिया जाएगा या उनकी भावनाओं को कमज़ोरी मान लिया जाएगा। इसलिए वे चुप रहना सीख जाते हैं।
समस्या यह नहीं कि बच्चे बोलना नहीं चाहते।
समस्या यह है कि उन्हें हमेशा यह भरोसा नहीं होता कि कोई बिना निर्णय दिए उन्हें सुनेगा।
एक बातचीत किसी बच्चे की दिशा बदल सकती है। कभी-कभी एक सवाल - "क्या तुम ठीक हो?" किसी लंबे मौन को तोड़ सकता है।
माता-पिता होने का अर्थ केवल बच्चों का भविष्य बनाना नहीं है; उनके वर्तमान को समझना भी है। बच्चों को सलाह देने से पहले उन्हें सुनना ज़्यादा ज़रूरी है।
मेरे लिए लेखन केवल कहानियाँ लिखना नहीं है। यह उन अनकही भावनाओं को आवाज़ देना है, जो अक्सर घरों की चारदीवारी के भीतर दब जाती हैं।
यदि आज इस लेख को पढ़ने के बाद आप अपने बच्चे, छोटे भाई-बहन या किसी किशोर से पाँच मिनट खुलकर बात करते हैं, तो शायद यह लेख अपना उद्देश्य पूरा कर चुका होगा।
क्योंकि कई बार ज़िंदगी बदलने के लिए बड़े भाषण नहीं, केवल एक सच्ची बातचीत काफ़ी होती है।
- अमित उत्थान (Amit Utthaan), उपन्यासकार , लेखक - WAR OF BREATH: सांसों की जंग & WAR OF BREATH: A Story of Silence, Pressure and Hope
Published on July 11, 2026 22:06
•
Tags:
children, communication, education, emotional-wellbeing, family, mental-health, parenting, relationships, society, war-of-breath, प-र-ट-ग, पर-व-र, बच-च, भ-वन-त-मक-स-व-स-थ-य, म-नस-क-स-व-स-थ-य, र-श-त, श-क-ष, स-व-द, स-स-क-ज-ग, सम-ज
No comments have been added yet.


