तनाव समाधान नहीं : संकेत है कि रुककर सोचने का समय आ गया है

आज की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने कभी तनाव महसूस न किया हो। परीक्षा का दबाव, नौकरी की चिंता, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ, भविष्य की अनिश्चितता या समाज की अपेक्षाएँ - हर किसी के जीवन में तनाव किसी न किसी रूप में मौजूद है।

लेकिन एक प्रश्न हम स्वयं से कम ही पूछते हैं:-

क्या तनाव वास्तव में हमारी किसी समस्या का समाधान करता है?

उत्तर है- नहीं

तनाव हमें समाधान के करीब नहीं ले जाता, बल्कि सही निर्णय लेने की हमारी क्षमता को कमज़ोर कर देता है। जब मन भय, चिंता और दबाव से घिर जाता है, तब हम अक्सर समस्या से अधिक उसके डर के बारे में सोचने लगते हैं। परिणामस्वरूप छोटी-सी चुनौती भी हमें असंभव लगने लगती है।

तनाव क्यों खतरनाक है?

तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव हमारे विचारों पर पड़ता है। यह हमें यह विश्वास दिलाने लगता है कि हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा। जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है।

हर समस्या का समाधान होता है, लेकिन तनाव हमें उस समाधान को देखने नहीं देता।

इसीलिए जब भी जीवन कठिन लगे, सबसे पहले समस्या नहीं, अपने मन को शांत करने का प्रयास कीजिए। शांत मन ही सही दिशा दिखाता है।

बच्चों और युवाओं के लिए एक संदेश

आज के समय में विद्यार्थी सबसे अधिक दबाव का सामना कर रहे हैं। अच्छे अंक, प्रतियोगी परीक्षाएँ, तुलना, सोशल मीडिया और दूसरों की अपेक्षाएँ कई बार उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं।

याद रखिए-

कोई Marksheet किसी बच्चे की असली पहचान नहीं होती।

अंक आपके जीवन का एक छोटा-सा हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन आपका व्यक्तित्व, आपकी संवेदनशीलता, आपका चरित्र और आपके सपने आपकी वास्तविक पहचान हैं।

माता-पिता की भूमिका

कई बार बच्चे सलाह नहीं चाहते, वे सिर्फ़ चाहते हैं कि कोई उनकी बात सुने।

आज अपने बच्चे से केवल एक प्रश्न पूछिए-

"तुम सच में कैसे हो?"

हो सकता है, यह छोटा-सा प्रश्न उसके जीवन में सबसे बड़ा सहारा बन जाए।

समाधान की ओर पहला कदम

जब भी तनाव महसूस हो - कुछ देर गहरी साँस लें।

• किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
• समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटकर देखें।
• आवश्यकता हो तो पेशेवर सहायता लेने में संकोच न करें।

* मदद माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता की निशानी है।

एक लेखक की बात

War of Breath (साँसों की जंग) लिखते समय मैंने महसूस किया कि अधिकांश समस्याएँ संवाद की कमी से और गहरी हो जाती हैं।

जब हम अपनी भावनाओं को दबाते हैं, तब तनाव बढ़ता है।
जब हम अपनी बात कहते हैं, तब समाधान की शुरुआत होती है।

इसलिए मेरा विश्वास है-

"तनाव किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समाधान खोजने की क्षमता को कमज़ोर कर देता है।"

आइए, हम एक ऐसा समाज बनाएँ जहाँ लोग अपनी परेशानियों को छिपाने के बजाय साझा करने में सहज महसूस करें। क्योंकि कभी-कभी एक बातचीत, एक सहारा और एक उम्मीद किसी की पूरी ज़िंदगी बदल सकती है।

Amit Utthaan
- Amit Utthaan
लेखक, WAR OF BREATH: सांसों की जंग
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