लश्कर ए बातिल
बूढ़ा हो गया है. चार साल की खिटर-पिटर की बरदाश्त की हद से आगे निकल चुका है. तीन किताबें और चार सौ लेख लिखे जा चुके हैं. अब अचानक से क्रेश हो जाता है. आभा कहती है नया ले लो या इसे कोसना बंद करो. मैं मगर इस लैपटॉप को न फटे जूते की तरह उतार फेंकता हूँ न शिकवे बंद करता हूँ.
हो सकता है आने वाली नस्ल मेरी कहानियों पर जाँ निसार हो जाये. जूते -टाई, स्लीपर और यहाँ तक की टॉयलेट पेपर के नीलाम होने की रवायत है तो पोसिबल है कि कोई इस लैपटॉप को तीन चार किताबें लिखने वाला नायाब यन्त्र और धरोहर समझ लें. केसी की अँगुलियों की छाप को अपने पास सहेज कर रख ले.
तो इसे अभी से सहेज कर रखो और नया ले लो.
मैं कहता हूँ नए से क्या करेंगे? अपनी जेब का पैसा लगाना, इंटरनेट के बिल भरना, अपने कीमती समय को चुराना और फालतू के अफ़साने लिखना और कोई इसका हासिल...
नयी कहानी शुरू की है. रोज़ कोई आठ दस लाइन लिख लेता हूँ. आज जब लैपटॉप क्रेश हुआ और फिर रीस्टार्ट हुआ तो वर्ड ने संदेसा सिया भाई कौनसी फ़ाइल बचाओगे? दोनों को खोला और कुछ समझ न आया कि मैं लिखता क्या हूँ. था कहाँ पर?
असल में लैपटॉप से ज्यादा याद का बुरा हाल है.
साहिर के दो शेर इसी बीच पढ़े.
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुर्म में
क़ातिल को जो न टोके वो क़ातिल के साथ है
हम सर ब कफ़ उठाये हैं के हक़ फ़तेह्याब हो
कह दो उसे जो लश्कर ए बातिल के साथ है.
सर ब कफ़ का अर्थ हुआ हथेली पर सर लिए हुए और लश्कर ए बातिल का मानी है झूठों की सेना.
हो सकता है आने वाली नस्ल मेरी कहानियों पर जाँ निसार हो जाये. जूते -टाई, स्लीपर और यहाँ तक की टॉयलेट पेपर के नीलाम होने की रवायत है तो पोसिबल है कि कोई इस लैपटॉप को तीन चार किताबें लिखने वाला नायाब यन्त्र और धरोहर समझ लें. केसी की अँगुलियों की छाप को अपने पास सहेज कर रख ले.
तो इसे अभी से सहेज कर रखो और नया ले लो.
मैं कहता हूँ नए से क्या करेंगे? अपनी जेब का पैसा लगाना, इंटरनेट के बिल भरना, अपने कीमती समय को चुराना और फालतू के अफ़साने लिखना और कोई इसका हासिल...
नयी कहानी शुरू की है. रोज़ कोई आठ दस लाइन लिख लेता हूँ. आज जब लैपटॉप क्रेश हुआ और फिर रीस्टार्ट हुआ तो वर्ड ने संदेसा सिया भाई कौनसी फ़ाइल बचाओगे? दोनों को खोला और कुछ समझ न आया कि मैं लिखता क्या हूँ. था कहाँ पर?
असल में लैपटॉप से ज्यादा याद का बुरा हाल है.
साहिर के दो शेर इसी बीच पढ़े.
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुर्म में
क़ातिल को जो न टोके वो क़ातिल के साथ है
हम सर ब कफ़ उठाये हैं के हक़ फ़तेह्याब हो
कह दो उसे जो लश्कर ए बातिल के साथ है.
सर ब कफ़ का अर्थ हुआ हथेली पर सर लिए हुए और लश्कर ए बातिल का मानी है झूठों की सेना.
Published on September 12, 2014 22:51
No comments have been added yet.
Kishore Chaudhary's Blog
- Kishore Chaudhary's profile
- 16 followers
Kishore Chaudhary isn't a Goodreads Author
(yet),
but they
do have a blog,
so here are some recent posts imported from
their feed.

