जाने क्या बात थी, उस उदासी में
विलासिता की चौंध से दूर. मन के नीम अँधेरे कोने में रखे किसी अहसास के करीब. खाली लम्हे में कभी सुनी गयी धड़कन की याद में डूबे हुए. बीत लम्हों की तस्वीरों से उड़कर आते रंगों के हल्के शालीन कोलाज में ज़िन्दगी है. बातें बेवजह कहने में ज़िन्दगी हैं. उसे बेहद प्रिय है मेरा इस तरह कहना. कहना कि ज़िन्दगी तुम बे परदा मेरे साथ चल रही हो. मैं तुम्हें रिश्तों और पाबंदियों में नहीं जीता. मैं किसी बोसे के गीलेपन में, किसी छुअन के ताप में और इंतज़ार की नीली शांत रौशनी में वैसा ही लिखता हूँ, जैसा महसूस करता हूँ. मैं ख़राब था और मैंने हमेशा चाहा कि ज़रा और खराब होते जाने कि गुंजाइश हमेशा बची रहे. मैं तनहा था और मैंने चाह कि और तन्हा होते जाने के सबब बने रहे. मैं प्रेम में था और सोचा कि प्रेम मुझे किसी शैतान नासमझी के कोहरे में ढक सारा मंज़र और मुझे चुरा ले.
यही चाहना, यही जीना है.
मैंने जब कहानियां कहनी शुरू की तो दोस्तों ने कहा केसी ये कहानियां किताब की शक्ल में चाहिए. मैं जो विज्ञान छोड़कर हिंदी साहित्य का विद्यार्थी हुआ था, मैंने ही मित्रों से कहा- “आपने ब्लॉग पर पढ़ ली न. अब क्या करना है इनका? मुझे लेखक या कवि कहानीकार कहलाने की चाह नहीं है. मैं सिर्फ ख़ुद को लिखना भरा चाहता हूँ.”
इसके तीन साल बाद मेरी कहानी की पहली किताब आई. चौराहे पर सीढ़ियाँ. मित्र सच्चे थे. उन्होंने पचास दिन में ही पहला संस्करण खरीद लिया. जाने उस उदासी और टूटन में क्या बात थी कि नए लोगों को भी खूब पसंद आई. एक अच्छे जीवन में एक ऐसा लम्हा होता है, जब लगता है कि हम ये सब क्यों कर रहे हैं? बस उन्हीं लम्हों की वे कहानियां. जीवन में कुछ चीज़ें और हाल, बिम्बों के माध्यम से बेहतर बयान होते हैं. ये बिम्ब ही थे, जिन्होंने उधड़ी हुई ज़िन्दगी को पैबन्दों से ढक कर एक बेहतर किस्सा बना दिया.
एक कविता की किताब आई थी. बातें बेवजह शीर्षक वाली इस किताब के चाहने वाले अलग थे. वे जो भी थे दीवानावार थे. उनको इन बातों से सम्मोहन था. खरगोश, शराब, शैतान की प्रेमिका, रेगिस्तान की गरम हवा, इंतज़ार और खालीपन के बिम्बों से कही गयी कुछ मामूली बातें ख़ास बनकर दोस्तों के दिल में बैठ गईं. ये कविता संग्रह ऑनलाइन कम ही उपलब्ध रहा. पुस्तक मेलों में दोस्त आये और खरीद ले गए. दोस्तों ने बताया कि किताब आ गयी है. कुछ एक को अभी तक न मिली. मैं अक्सर सोचता हूँ कि मायामृग जी से पूछूँ कि किताब का क्या हाल है? लेकिन बुझे मन में चाह जागती ही नहीं. ये स्थागित होता जाता है.
अचानक एक दोस्त ने अपनी खरीदी हुई किताब में पेन्सिल से अनुवाद करना शुरू कर दिया. ये इसी बरस जून महीने की बात होगी. कुछ महीने पहले मेरे पास डाक से आया एक पार्सल रखा था. मुझे अपनी ही किताब मिली. मैंने अचरज से खोला. उसमें जो कुछ पाया उसे देखकर क्या महसूस हुआ? उसका बयान मुमकिन नहीं है. मेरे पास शुक्रिया और तारीफें नहीं थी. इसलिए कि ये काम इन चीज़ों के लिए नहीं किया गया था.
मैंने शैलेश जी से पूछा कि इस किताब को कहीं से छपवा सकते हैं?
शैलेश भारतवासी ने कहा कि कुछ अंग्रेजी प्रकाशकों को भेजते हैं. मैंने कहा- “नहीं. अव्वल तो कविता कौन खरीदता है. उस पर अनुवाद की हुई कविता. तिस पर ये केसी है कौन?” इसलिए कोई ऐसा प्रकाशक जो किताब छापने में सवाल न करे और उसे ऑनलाइन उपलब्ध करवा दे. इन नीले रंग से भरी चाह्नानों, हलके नीले रंग की बरबादियों और उससे भी हलके नीले रंग की उम्मीदों के लिए हमने तय किया इसका लिमिडेट एडिशन छापते हैं. लिमिटेड एडिशन माने कम प्रतियाँ. वे लोग जो इसका प्री ऑर्डर करेंगे और बाकी सौ किताबें. मेरी किताब का पहला एडिशन एक हज़ार कॉपी का छपता है लेकिन हम इसकी दो सौ प्रतियाँ ही छापेंगे. यही सब आज तय किया.
एक अरसे बाद लैपटॉप को इसलिए ऑन किया है कि मैं लिखने से जुड़ा कोई काम शुरू करने जा रहा हूँ. मैं शुरू करूँगा तो शायद बहुत कुछ लिखूंगा.
कुछ एक आपके लिए [आंग्ल भाषा में मेरा हाथ तंग है. मैं जैसा पढ़ पाया हूँ वैसा मैंने कॉपी कर दिया है. अग्रिम मुआफ़ी.]
At last
my smile came back.
When I thought
That the sorrow of
not being with you
is only one lifelong.
* * *
There can’t be a worst sorrow than this.
That someone is kissing you right next to your neck.
and you are thinking of someone else.
* * *
Hot winds pierce the leaves bodies
sparrow keep hoping on a branch
life in desert moves on.
Resting against the wall
the devil thinks about his beloved.
Like a pulley in a dry well
a separated heart cries
and like a blade cutting wood
shines love in separation.
Nearby the sounds of marriage drums sing
Devil’s beloved, devil’s beloved, devil’s beloved.
And the devil dies in her memory.
* * *
They confiscated my dice
and ostracised me saying
I am the cheapest gambler.
On all side of my dice was your name. * * *
[Painting courtesy : Molly Prince]
Published on November 20, 2015 00:02
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