Sachin Kumar > Sachin's Quotes

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  • #1
    Oscar Wilde
    “Anybody can sympathise with the sufferings of a friend, but it requires a very fine nature to sympathise with a friend's success.”
    Oscar Wilde

  • #2
    Divya Prakash Dubey
    “हमारे पहले कदम से लेकर आखिरी कदम तक तय की गयी दूरी की लंबाई जिन्दगी के बराबर होती है । इसीलिए शायद जिन्दगी हमें भटकाती है ताकि हम अपने हिस्से भर की जिन्दगी चल पायें। ये कहानियाँ भटककर संभलने और संभलकर दुबारा भटकने के दौरान तय की गयी दूरियाँ भर हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #3
    Divya Prakash Dubey
    “क्यूँ ये आदमी आदमी बनने पर तुला हुआ था”
    Divya Prakash Dubey, Terms and Conditions Apply

  • #4
    Divya Prakash Dubey
    “कुछ लोग सुख में ज़्यादा खा लेते हैं और दुख में खा नहीं पाते। पांडे जी आदत से एकदम कम्यूनिस्ट थे। inter-cast शादी हो या तेरहवीं दोनों में समान भाव से खाते थे।”
    Divya Prakash Dubey, Terms and Conditions Apply

  • #5
    Divya Prakash Dubey
    “ये जो and please be honest हैं न ये बार बार इसलिए बोला जाता है ताकि गलती से अगर बंदा बातों में आकार भूल गया है कि उसको सब सच बोलना है तो वो एक बार सोच ले और वही बोले जो इंटरव्यू crack करने के लिए ठीक हो । वरना ज़्यादा honest होने के जो भी फ़ायदे नुकसान हैं वो किसी से दुनिया में छुपे थोड़े हैं।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #6
    Divya Prakash Dubey
    “पता नहीं अगर कभी कोई हिसाब लगता कि समाज ने कितने घरों को जोड़ा और कितनों को तोड़ा है तो शायद ही समाज दुनिया की किसी भी कॉलोनी में मुँह दिखाने लायक बचता।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #7
    Divya Prakash Dubey
    “मयंक स्कूल में तब तक यशवी के लिए जगह बचाकर रोककर रखता रहा जब तक एक दिन वो उसे भूल नहीं गया । उधर यशवी भी मयंक का तब तक इंतज़ार करती रही और ताजमहल वाले promise और अपनी शादी के बारे में सोचती रही जब तक वो एक दिन मयंक को भूल नहीं गयी और बची कावेरी ....हाँ बची कावेरी..... कभी मम्मी बनकर तो कभी पापा बनकर तो कभी fill in blanks बनकर”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #8
    Divya Prakash Dubey
    “उसे भी कोई regret नहीं था । Basically वो अपनी शादी को लेके शुरू से ही बहुत excited थी वो चाहे मुझसे होती या फ़िर किसी और से होती।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #9
    Divya Prakash Dubey
    “सब कुछ नहीं कह सकते न हम लोग । कुछ चीजें केवल हमारी होती हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #10
    Divya Prakash Dubey
    “आज कल की किसी भी शादी में जय माल के टाइम पर जितनी आसानी से लड़के लड़कियां एक दूसरे से इशारों में बात कर लेते हैं उसको देख के ये जानना करीब करीब असंभव है कि शादी love है या arrange।”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #11
    Divya Prakash Dubey
    “एक उम्र होती है जब क्लास की खिड़की से बाहर आसमान दूर कहीं जमीन से मिल रहा होता है और हमें लगता है कि शाम को खेलते-खेलते हम ये दूरी हम तय कर लेंगे। दूरी तय करते-करते जिस दिन हमें पता चलता है कि ये दूरी तय नहीं हो सकती, उसी दिन हम बड़े हो जाते हैं”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय

  • #12
    Divya Prakash Dubey
    “जो भी प्यार पूरे नहीं हो पाते उनको चक्कर ही बोला जाता है न, प्यार पूरे होने का केवल और केवल इतना मतलब है कि आपने जिस लड़की को I love you बोला था उसके घर आप बैंड बाजे के साथ पहुँच पाये। आगे शादी चले न चले उससे प्यार के पूरे और अधूरेपन पर कोई असर नहीं पड़ता”
    Divya Prakash Dubey, मसाला चाय



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