Satish

Add friend
Sign in to Goodreads to learn more about Satish.

http://www.SatishChandraGupta.com
https://www.goodreads.com/scgupta

Loading...
Ramdhari Singh 'Dinkar'
“प्रासादों के कनकाभ शिखर,
होते कबूतरों के ही घर,
महलों में गरुड़ ना होता है,
कंचन पर कभी न सोता है.
रहता वह कहीं पहाड़ों में,
शैलों की फटी दरारों में.

होकर सुख-समृद्धि के अधीन,
मानव होता निज तप क्षीण,
सत्ता किरीट मणिमय आसन,
करते मनुष्य का तेज हरण.
नर वैभव हेतु लालचाता है,
पर वही मनुज को खाता है.

चाँदनी पुष्प-छाया मे पल,
नर भले बने सुमधुर कोमल,
पर अमृत क्लेश का पिए बिना,
आताप अंधड़ में जिए बिना,
वह पुरुष नही कहला सकता,
विघ्नों को नही हिला सकता.

उड़ते जो झंझावतों में,
पीते जो वारि प्रपातो में,
सारा आकाश अयन जिनका,
विषधर भुजंग भोजन जिनका,
वे ही फानिबंध छुड़ाते हैं,
धरती का हृदय जुड़ाते हैं.”
Ramdhari Singh Dinkar, रश्मिरथी

year in books
Maneesh...
344 books | 274 friends

Ankur Jain
314 books | 28 friends

Kinjal ...
0 books | 23 friends

Margo A...
54 books | 20 friends

Ravi Ki...
23 books | 541 friends

Rahul Rai
8 books | 24 friends

Amit Gupta
2 books | 39 friends

Sanjeev...
0 books | 125 friends

More friends…



Polls voted on by Satish

Lists liked by Satish