Discover new books on Goodreads
Meet your next favorite book
“माता के गर्भ में ही जीव को अपने अनेक जन्मों के स्मरण से सुख-दु:ख होता रहता है और बाहर आने पर भी वह इस दुःख और सुख से भरा होता है और इस संसार में रमण करता है। माता के गर्भ से बाहर आकार वह गर्भ-यंत्र की पीड़ा से तो मुक्त हो जाता हैं लेकिन संसार के मोह में पड़ जाता है। उसकी पूर्व स्मृति नष्ट हो जाती है।”
― Shiv Puran
― Shiv Puran
“प्रकृति माया है और इसके मूल कर्म से योग रखने वाला पुरूष है।”
― Shiv Puran
― Shiv Puran
“साक्षात् महेश्वर ही प्रणव हैं। इस प्रणव के छः प्रकार के अर्थ हैं! मंत्ररूप, मंत्रभाव, प्रपंचा, वेदार्थ, रूप तथा शिष्य के अनुरूप। और ये सब एक महेश्वरी माने जाते हैं। शिवजी की पांच मूर्तियां इसीसे निर्दिष्ट होती हैं जो पंचमुख शिव की होती हैं। यही प्रणव आकाश का अधिपति सदाशिव समष्टि रूप और सर्व सामर्थ्यवान है।ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र और महेश्वर ये चारों भिन्न-भिन्न रूप इसी प्रणव की समष्टि हैं। महेश्वर के सहस्त्र अंश से रूद्र मूर्ति उत्पन्न हुई है और जैसा की अनेक प्रसंगों में बताया गया है यही सृष्टि जन्म के रूप में ब्रह्मा, पालन कर्ता के रूप में विष्णु और विनाश के समय रूद्र होते हैं। वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध ये चार विख्यात नाम भी व्यूह रूप ही हैं।”
― Shiv Puran
― Shiv Puran
“शिव का रूद्र नाम इसलिए पड़ा कि वे दु:ख-सुख को दूर करने वाले हैं। उन्हें पितामह इसलिए कहा जाता है कि वे मूर्तिमान पिता हैं और उनकी सदा से विष्णु नाम की संज्ञा सर्वव्यापक होने के कारण है। वे सर्वज्ञ हैं और किसी अन्य आत्मा के अधीन नहीं, इसलिए परमात्मा हैं।”
― Shiv Puran
― Shiv Puran
“तप के तीन प्रकार हैं—सात्त्विक, राजसिक, और तामसिक। निष्काम भाव और हित से किया गया तप सात्त्विक होता है। सात्त्विक के अंतर्गत ही पूजा व्रत, दया, कूप, वापी बनवाना है। इससे संपूर्ण फलों की प्राप्ति होती है।”
― Shiv Puran
― Shiv Puran
akshunna’s 2025 Year in Books
Take a look at akshunna’s Year in Books, including some fun facts about their reading.
More friends…
Favorite Genres
Polls voted on by akshunna
Lists liked by akshunna















