akshunna

Add friend
Sign in to Goodreads to learn more about akshunna.


The Prophet Of Mo...
Rate this book
Clear rating

 
Loading...
“मैं ही पुरातन पुरुष हूं, सबका नियंता हूं और मुझसे भिन्न कोई नहीं। न कोई मुझसे बड़ा है और न मेरे समान। यह कहकर रूद्र अंतर्ध्यान हो गए और इससे देवता घबरा गए। देवताओं ने उनकी स्तुति की तब प्रसन्न होकर शिवजी पार्वती सहित देवताओं के सामने प्रकट हुए। तब देवताओं ने उनसे पूछा कि हे भगवन्! आप यह बताएं कि आपकी पूजा की विधि क्या है और आप किस प्रकार प्रसन्न होते हैं और आपकी पूजा का अधिकार किस-किसको है। इस पर शिवजी ने पार्वती की ओर देखा और देवताओं को अपना सर्व तेजमय, सर्वगुण संपन्न आठ बांहों वाला तथा चार मुख वाला स्वरुप दिखाया। देवताओं ने उनके तेज को अनुभव किया तथा महादेव को सूर्य और महेश्वरी को चंद्रमा समझकर उन दोनों की आराधना की। इसके बाद सूर्य मंडल में स्थित शिव ने देवताओं को सारा ज्ञान समझाकर स्वयं को अंतर्निहित कर लिया। उस ज्ञान से तीन द्विजाति—ब्राम्हण, क्षत्रिय और वैश्य को पूजा का अधिकार जानकर देवता लोग स्वर्ग को चले गए। इससे यह सिद्ध होता है कि शूद्रों को शिव की पूजा का अधिकार नहीं। बहुत समय के बाद जब वह शस्त्र विलुप्त हो गया तो परमेश्वरी ने चंद्रभक्‍ति को कहकर उसे पुनः प्रकट कराया और इस शास्त्र को मैंने अगस्त्य और इस दधीचि से जाना। फिर हमसे वसिष्ठ आदि मुनियों ने यह ज्ञान प्राप्त किया। इसी परंपरा में योगाचार्य व्यासजी का अवतार हुआ।”
Vinay Bhojraj Dwivedi, Shiv Puran

“उनकी प्रार्थना से सनक कुमार जी करुणा से भर गए और उन्होंने कहा कि मैना हिमाचल की पत्नी बनकर पार्वती को जन्म देगी और धन्या से जनक के यहां सीता का जन्म होगा और वृषभानु से विवाह करके कलावती राधा को जन्म देगी। अपनी इन पुत्रियों के कारण ही तुम अपना उद्धार करके स्वर्ग में लौट सकोगी।”
Vinay Bhojraj Dwivedi, Shiv Puran

“माता के गर्भ में ही जीव को अपने अनेक जन्मों के स्मरण से सुख-दु:ख होता रहता है और बाहर आने पर भी वह इस दुःख और सुख से भरा होता है और इस संसार में रमण करता है। माता के गर्भ से बाहर आकार वह गर्भ-यंत्र की पीड़ा से तो मुक्त हो जाता हैं लेकिन संसार के मोह में पड़ जाता है। उसकी पूर्व स्मृति नष्ट हो जाती है।”
Vinay Bhojraj Dwivedi, Shiv Puran

“पंचभूत जब गुण ग्रहण करते हैं तो जन्म होता है और जब गुणों का त्याग करते हैं तो मृत्यु होती है। योगी जब अपनी तर्जनियों से अपने दोनों कान बंद करते हैं तो उन्हें एक अग्नि प्रेरित तुंकार शब्द सुनाई देता है यह शब्द सुनकर योगी मृत्यु को जीत लेता है।”
Vinay Bhojraj Dwivedi, Shiv Puran

“शिव का रूद्र नाम इसलिए पड़ा कि वे दु:ख-सुख को दूर करने वाले हैं। उन्हें पितामह इसलिए कहा जाता है कि वे मूर्तिमान पिता हैं और उनकी सदा से विष्णु नाम की संज्ञा सर्वव्यापक होने के कारण है। वे सर्वज्ञ हैं और किसी अन्य आत्मा के अधीन नहीं, इसलिए परमात्मा हैं।”
Vinay Bhojraj Dwivedi, Shiv Puran

year in books
Anurag ...
10 books | 55 friends

अभिषेक ...
3 books | 78 friends

Alok Pa...
7 books | 6 friends

Uma Cha...
6 books | 65 friends

Punit T...
5 books | 45 friends

Vasudha...
63 books | 69 friends

Shaligram
15 books | 78 friends

Sumit S...
25 books | 26 friends

More friends…

Favorite Genres



Polls voted on by akshunna

Lists liked by akshunna