Status Updates From Jahaj Ka Panchi
Jahaj Ka Panchi by
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विकास 'अंजान'
is finished
"चलो, तुमने भी परीक्षा करके देख लिया कि मुझे बुखार नहीं आ सकता, भले ही सिरदर्द हो जाये और वह सिरदर्द भी तुम्हारे हाथों के कोमल स्पर्श से भाग जाता है और उस सिरदर्द का दुर्भाग्य देखो कि इतना सुखद स्पर्श उसके लिए घातक सिद्ध होता है!" "जाओ, तुम फिर ठिठोली करने लगे!" बच्चों की तरह मुँह बनाकर शिकायत करती हुई और साथ ही आँखें और भौंहें नचाती हुई लीला बोली।
— May 27, 2016 09:01PM
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विकास 'अंजान'
is finished
ज्ञान और आदर्श की दृष्टि से कल्पना के आकाश के उच्चतम स्तर तक पहुँचने पर भी वास्तविकता की दृष्ट से आज मानवता नरक के निम्नतम स्तर में दम तोड़ रही है।इसलिए मैं कह रहा था कि उन्नतम आध्यात्मिक, नैतिक और कलात्मक आदर्शों के हवाई नारे आज क्रूर परिहास की तरह लगते हैं, जबकि पग-पग पर विशव का जन-जीवन उत्तरोत्तर अधिक विअ,विश्रिंखल, दलित और शोषित होता चला जा रहा है।
— May 26, 2016 09:20PM
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विकास 'अंजान'
is finished
कहानी के नायक को आश्रय मिलता है और फिर कुछ ऐसी घटना हो जाती है कि उससे वो आश्रय छिन जाता है। इसके इलावा एक और बात है कि आधी से ज्यादा किताब पढ़ चुका हूँ, कई किरदारों के नाम पता चले हैं लेकिन नायक का नाम अभी तक नहीं पता चला है। नायक तो दूसरों को नाम लेकर पुकारता है लेकिन कोई उसे नाम लेकर नहीं पुकारता। सोच रहा हूँ लेखक ने ऐसा क्यों किया होगा?
— May 26, 2016 03:10AM
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विकास 'अंजान'
is on page 87 of 144
87/332 नायक को रहने का ठिकाना मिल चुका है। करीम चाचा से उसकी गहरी मित्रता हो चुकी है। करीम चाचा का किरदार मुझे पसंद आया। रामकली और उनके बीच जो प्रेम था उसे वो पहचान नहीं पाये। इसका अफओस है।
— May 24, 2016 12:16PM
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विकास 'अंजान'
is on page 68 of 144
कहानी दिलचस्प होती जा रही है। देखें नायक की किस्मत में क्या लिखा है।
— May 22, 2016 06:41AM
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विकास 'अंजान'
is on page 12 of 144
मैं देख रहा था कि उस 'नटखट छोकरी' की याद आ जाने से प्यारे की आँखों में रस छलक उठा था। कुछ ही क्षण पहले गहन विषाद की जिस घनी काली छाया ने पूर्ण ग्रहण की तरह उसके चेहरे को ग्रस लिया था वह पल में साफ़ हो गई; एक स्वस्थ और सजीव अनुभूति के प्रकाश से उसका मुख चमक उठा ।देखकर मेरे मन से जैसे एक भार हट गया।
— May 18, 2016 10:34PM
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विकास 'अंजान'
is on page 8 of 144
अभी तक आठ ही पृष्ठ पढ़े हैं और केवल इतना पता चला है कि नायक ने अपनी ईमानदारी के वजह से कई जगह धोखे खाये हैं। इससे उसका विश्वास न मनुष्यता से उठा है और न ही उसे कभी अपने ईमानदार चरित्र के लिए पछतावा हुआ है।परंतु वो अब एक नए शहर में एक ऐसे व्यक्ति की ज़िन्दगी बिता रहा है जिसके पास न छत है और न दो वक्त का खाना। उसे देखकर ही लोग उसे अपराधी मान लेते हैं।क्या हुआ होगा इसके साथ?
— May 18, 2016 12:50PM
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