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Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 191 of 224
हर चीज़ अंत में मुट्ठी में पड़ी रेत-सी फिसलती चली जाती है।
जितना कसकर उसे पकड़ने की सोचो वो उतनी ही जल्दी फिसलने लगती है।
Jun 13, 2026 05:32AM
तितली

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Shaikhul’s Previous Updates

Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 191 of 224
हम मनुष्यों के जीवन में यह एक सवाल बार-बार मुँह उठाकर सामने आता है कि
आख़िर हम क्यों मरें ?
Jun 13, 2026 01:07AM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 154 of 224
कभी-कभी बहुत प्रतिभा भी सागर की एक बड़ी मछली की तरह होती है,
अगर आपके भीतर के तालाब में उस मछली के विचरण की जगह नहीं होगी तो वो उस तालाब को अस्त-व्यस्त कर देगी।
आपकी प्रतिभा का संबंध आपके भीतर के शांत सागर से है।
Jun 11, 2026 11:44AM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 154 of 224
Jun 11, 2026 11:41AM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 130 of 224
क्या हम सबको बस थोड़ा दूर जाने की ज़रूरत है ?
शायद जो लोग पृथ्वी के बाहर जाते हैं
उन्हें इंसानी स्थिति और उनकी आपसी लड़ाई का बचकानापन ज़्यादा साफ़ नज़र आता होगा।
Jun 09, 2026 11:49AM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 99 of 224
मेरी माँ कहती थीं कि शब्द अमर होते हैं, इसीलिए उन्हें अ-क्षर कहते हैं, जो क्षर न हों।

उनका विश्वास था कि आपके कहे शब्द, आपके मुँह से निकलने के बाद घूमकर आपके पास एक दिन वापस आते हैं, सो अगर आपने अच्छा कहा है तो वो आते वक़्त बहुत-सी अच्छी बातों को अपने साथ खींचकर ले आते हैं, और अगर बुरा कहा है तो एक दिन ढेरों बुराइयाँ आपसे आकर टकराती हैं।
Jun 07, 2026 12:10PM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 91 of 224
मृत्यु एक घटना है
वो सिर्फ़ बर्फ़ की तरह
सुन्न कर देती है
पीड़ा बाद में आती है
काल की तपन में
बूंद-बूंद पिघलती हुई।

-निर्मल वर्मा
Jun 06, 2026 02:57AM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 58 of 224
Jun 03, 2026 11:20AM
तितली


Shaikhul Hassan
Shaikhul Hassan is on page 35 of 224
Jun 01, 2026 01:53AM
तितली


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