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Arkjesh Kumar
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श्रीयुत भुवनेश्‍वर प्रसाद, जो इस दुनिय में कुछ दिन रहे रचा, और फिर गायब हो गए। न जाने कब और किन अंधेरों उजालों मे जागते-सोते उन्‍होंने अपनी रचनाऍं लिखीं। श्रीयुत् भुवनेश्‍वर प्रसाद जिन्‍होंने अपनी लेखकीय आजादी को पूरी दबंगई और आत्‍मसम्‍मान से अपने सुनसानों में ओढ़ा-बिछाया,बरता और बिना किसी समझौतेके बुझ गए। श्रीयुत भुवनेश्‍वर प्रसाद का निर्वाण एक कला है, जिसकी कोई मिसाल नहीं। और होनी भी नहीं चाहिए। - भूमिका से
Oct 18, 2014 10:21PM
भुवनेश्वर समग्र

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यह पुस्तक भुवनेश्वर की समस्त रचनाओं को पेश करती है। साथ ही उनके जीवन और उनके काम का न्यायोचित विश्लेषण करती है। भुवनेश्वर की रचनाओं की पढकर लगता है कि इन्हें और पढें । लेकिन भुवनेश्वर पढने के लिए थोड़ा ही देकर गये हैं।
एक जीनियस जिसे समाज संभाल नहीं सका और उसने खुद को संभालना नहीं चाहा।
Apr 15, 2019 10:54PM
भुवनेश्वर समग्र


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