Find & Share Quotes with Friends

श्मशान चंपा Quotes

Rate this book
Clear rating
श्मशान चंपा श्मशान चंपा by Shivani
235 ratings, 3.97 average rating, 11 reviews
श्मशान चंपा Quotes Showing 1-30 of 73
“केवल शरीर की व्याधि ही नहीं, मन की व्याधि भी माँ को धीरे-धीरे घुला रही”
Shivani, श्मशान चंपा
“दुर्भाग्य के विष को कंठ ही में घुटक,”
Shivani, श्मशान चंपा
“एक पल को उस विकृत हँसी के स्वर ने चंपा को सहमा दिया ।”
Shivani, श्मशान चंपा
“मैं तक मैत, भै तक दैज।’ जब तक माँ है, तब तक मायका और जब तक भाई है तब तक दहेज ।”
Shivani, श्मशान चंपा
“दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला ।”
Shivani, श्मशान चंपा
“लगता था, किसी सुदूर अतीत की निर्धूम वहि ही उस चेहरे को रह-रहकर म्लान कर रही है”
Shivani, श्मशान चंपा
“श्मशान की ऊष्मा लिए उसका सौन्दर्य देखने वाले को सहमा जाता था ।”
Shivani, श्मशान चंपा
“कहते हैं कि विपत्ति कभी अकेली नहीं आती। विपत्ति का मेघखंड पहले उस परिवार पर गृहस्वामी का सस्पेंशन बनकर मँडराया था”
Shivani, श्मशान चंपा
“जनशून्य एकान्त की कामना थी।”
Shivani, श्मशान चंपा
“यद्यपि यह उज्ज्वल, स्निग्ध और सुगंधित है तब भी श्मशानवीथी में विकसित चम्पक वृक्ष की भाँति लोगों द्वारा अभिगमनीय नहीं है । कोई भी तेरे पास नहीं आना चाहेगा। चंपा नहीं, श्मशान चंपा है तू”
Shivani, श्मशान चंपा
“अविवाहित माताओं की परित्यक्त सन्तान”
Shivani, श्मशान चंपा
“अंगों में यौवन की मादकता छलकी पड़ती थी, गंभीर मुखमंडल और आंखों में स्थिर तेज, साथ में अंकुरित नवयौवना”
Shivani, श्मशान चंपा
“विवेक की न्यायतुला”
Shivani, श्मशान चंपा
“एक शब्द न कहने पर भी, जैसे दोनों ने एक-दूसरे के हृदय में उमड़ रही तरंगों को छू लिया”
Shivani, श्मशान चंपा
“सुव्यवस्थित जीवन में वह काल-वैशाखी की ही तेज़ी से आकर तोड़-फोड़”
Shivani, श्मशान चंपा
“अवगुंठनवती नवोढ़ा”
Shivani, श्मशान चंपा
“संयम की भीमशिला”
Shivani, श्मशान चंपा
“यत्न से रोका गया अश्रुगहर”
Shivani, श्मशान चंपा
“जो पुरुष किसी दूसरे पुरुष को प्रेयसी कहकर सम्बोधित कर सकता है, वह क्या कभी स्त्री से प्रेम कर सकता है?”
Shivani, श्मशान चंपा
“मृतवत्सा गाय-सी ही रंभाने को व्याकुल हो उठी थी,”
Shivani, श्मशान चंपा
“शुभ कार्य में विघ्न डालने वालों का संसार में कभी अभाव नहीं”
Shivani, श्मशान चंपा
“बकर-बकर ही उसकी सौन्दर्य-आभा को स्वयं मलिन कर देती”
Shivani, श्मशान चंपा
“चुप्पी ही तो उसका सबसे बड़ा आकर्षण”
Shivani, श्मशान चंपा
“उस भ्रूविलास से स्पष्ट कर दिया”
Shivani, श्मशान चंपा
“भुवन-मोहिनी भ्रूभंगिमा से ही बोलना सीख लिया”
Shivani, श्मशान चंपा
“जहाँ ढोलक झमकी कि जया फिरकी-सी घूमने लगती। अपनी पतली कमर को वह बेंत-सा मोड़ती”
Shivani, श्मशान चंपा
“मैल से पांडुजीर्ण कुरते का कॉलर देखकर उसे तरस आ गया था”
Shivani, श्मशान चंपा
“अद्वितीया स्वर-लय-नटिनी,”
Shivani, श्मशान चंपा
“आग्नेय दृष्टि से”
Shivani, श्मशान चंपा
“ठसकेदार चाल थी लड़की की और कैसी मद-भरी चितवन”
Shivani, श्मशान चंपा

« previous 1 3