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रतिविलाप Quotes

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रतिविलाप रतिविलाप by Shivani
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रतिविलाप Quotes Showing 1-30 of 38
“न सूरत, न शकल, पर फिर भी लापरवाही से उसकी आँचल की स्मरध्वजा-सी फहराने की भंगिमा, परिपाटी से बाँधा गया जूड़ा, जूड़े पर लगा बेल का दक्षिणी गजरा, सुडौल मराल ग्रीवा में काले डोर से बँधी सोने की तबिजिया, छन्दमयी गति और बंकिम स्मित देख कोई भी नहीं कह सकता था”
Shivani, रतिविलाप
“नारी सौन्दर्य के आदर्श की ऐसी सफल अभिव्यक्ति और मिल ही कहाँ सकती थी? मूर्ति के पूर्ण विकसित उरोज, विस्तृत नितम्ब, प्रणयोन्मत्त मदमाती उनींदी आँखें और लास्यपूर्ण चेष्टाएँ।”
Shivani, रतिविलाप
“जैसे सूर्य की प्रथम किरण ने खिड़की के काँच का स्पर्श किया, नवजात शिशु के क्रन्दन से कमरा गूँज उठा। कैसा अद्‌भुत पीड़ा-मुक्ति का था वह क्षण! क्षण-भर पूर्व की पीड़ा का कैसा आनन्ददायक अन्त था वह।”
Shivani, रतिविलाप
“किसी शतावरी क्षीण लता की भाँति उसकी जड़ें धरा से लाख खींची जाने पर भी, सहज ही में वह विच्छिन्न नहीं कर पाएगी,”
Shivani, रतिविलाप
“हृदय की बातें अन्धकार में ही, निर्भीकता से प्रखर होती हैं, प्रकाश में नहीं।”
Shivani, रतिविलाप
“कुटिल संसार के विषम गली-कूचों से प्रत्येक लड़की को गुजरना होता है, बिदू! किन-किन खन्दक-खाइयों से उसे बचना होगा, क्या कभी उसे बताने का भी समय रहा था दामिनी के पास? क्षुब्ध ग्लानि से अवसन्न अवगुंठिता दामिनी खड़ी ही रह गई थी।”
Shivani, रतिविलाप
“कुटिल संसार के विषम गली-कूचों से प्रत्येक लड़की को गुजरना होता है,”
Shivani, रतिविलाप
“एक बार भी नहीं सोचा कि उस विवेकहीन प्रणय-यात्रा का अन्त क्या होगा? दिन डूबे वह घर लौटी और भूल-भरे कपड़ों में ही, पलंग”
Shivani, रतिविलाप
“हृदय, किसी वयःसन्धि पर खड़ी किशोरी के ही दुर्बल हृदय-सा काँप उठा।”
Shivani, रतिविलाप
“उस उद्दाम अविवेकी यौवन में, तब क्या आज के प्रौढ़ नारीत्व का विवेक कभी हो सकता था?”
Shivani, रतिविलाप
“उस कुटिल एकान्त में स्वयं नियति का षड्‌यन्त्र निहित था?”
Shivani, रतिविलाप
“जब माँ का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली बन उठता है, तब संतान कितनी ही शक्तिशाली क्यों न हो कुछ-न-कुछ अंश में अन्तर्मुखी बन ही जाती है। वैदेही”
Shivani, रतिविलाप
“भाषा, कोई भी क्यों न हो, उसमें प्रशंसा या निन्दा की स्वरलिपि उस भाषा से अनभिज्ञ लोग भी समझ लेते”
Shivani, रतिविलाप
“स्वयं मनुष्य के अतीत का दौर्बल्य ही उसे अपनी सन्तान के प्रति ऐसा शंकालु बना देता है।”
Shivani, रतिविलाप
“भाषा, कोई भी क्यों न हो, उसमें प्रशंसा या निन्दा की स्वरलिपि उस भाषा से अनभिज्ञ लोग भी समझ लेते हैं।”
Shivani, रतिविलाप
“आज भी दीवारों पर रैब्राँ, वॉन गॉग, पिकासो और सेजाँ के चित्र टँगे थे और बीच में लगा था—रवि वर्मा द्वारा अंकित”
Shivani, रतिविलाप
“होंठों पर ऐसे जीभ फेरने लगी थी, जैसे किसी ऊँची डाल पर पका रसीला आम देख लिया हो।”
Shivani, रतिविलाप
“समुद्र की फेनोज्जल उद्धत तरंगों का औद्धत्य यहाँ सबसे अधिक अनुशासनहीन हो जाता”
Shivani, रतिविलाप
“समुद्रतट के एकान्त से बढ़कर और कोई एकान्त हो नहीं सकता।”
Shivani, रतिविलाप
“मुझे इजा कहा है इसने, इजा...!”
Shivani, रतिविलाप
“पन्त-पांडे-जोशियों का मुहल्ला है। यहाँ झिजाड़ के दीवान और कसून के पांडे के घरों में शंख-घट बजते हैं,”
Shivani, रतिविलाप
“टीप, काले मखमल की पट्टी में गुँथा गुलुबन्द, लड़ीवाले झूमके, सतलड़, पचलड़, चूहादंती पहुँची, झाँवर, लच्छे, अनोखे और छागल,”
Shivani, रतिविलाप
“शाल-दुशाले, तिब्बती आसन, नम्दे, चुटके मृगचर्म,”
Shivani, रतिविलाप
“आकर मृगचर्म माँग ले जाते। ‘बवासीर की एक ही रामबाण औषधि”
Shivani, रतिविलाप
“चुडकन्त (बेहद गर्म)”
Shivani, रतिविलाप
“जरगे की पत्तियाँ”
Shivani, रतिविलाप
“कुरकुरे गाबे”
Shivani, रतिविलाप
“पहाड़ी फीणा कमरे में बिछा”
Shivani, रतिविलाप
“प्रत्येक प्रश्न को उसकी दूधिया हँसी ने झाड़-बुहारकर दूर फेंक दिया”
Shivani, रतिविलाप
“कोयले की कोठरी की कालिख बड़ी पक्की होती है, समझी?’ पर कहाँ समझी”
Shivani, रतिविलाप

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