मधुयामिनी Quotes
मधुयामिनी
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मधुयामिनी Quotes
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“असली घी में बन रहे पराँठों की सुगन्ध, तो कभी सूजी की सोंधी लपट। कभी हींग-मेथी की बघार का धुआँ, तो कभी उड़द के बड़ों की छन्न-छन्न। इधर मैं ‘विष्णु-विष्णु!’ कर आचमन लेती, उधर ललाइन गर्म घी में दुश्मन-सा मालपुआ छोड़ देती। “ललाइन”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“अम्बरी तम्बाकू के सुवासित छल्ले उड़ाती रोहिल्ला पठानियों के सतरंगी अबरकी दुपट्टे की स्मृति मुझे विह्वल कर जाती है।”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“संगमरमरी फर्श में बजते पैजनों की झंकार, खङ्ग-सी तीखी राजपूती नासिका पर चमकती सोने की बुन्देलखंडी ‘पुगनिया’, ककरेजी कछौटे से झाँकती सुडौल गेहूँगोरी पिंडलियाँ”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“वही चिरपरिचित स्निग्ध हँसी, उदार आँखों में अकपट वात्सल्य और अनुभव की झुर्रियों में न जाने कितने अनाथ हृदयों के कृतज्ञ हस्ताक्षर! कैसा बोलता, जीता-जागता चित्र था!”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“हाँ, मेरी सगाई होते ही एक वायरस इनफैक्शन में इनकी दोनों आँखें जाती रहीं। अच्छा, अब चलूँ, देर हो रही है।’ उसने नमस्कार की मुद्रा में अपनी हथेलियाँ जोड़ी भी नहीं थीं कि कुतूहलप्रिया रीना ने अपने क्रूर प्रश्न की अन्तिम गोली दागी—‘क्या आपका परिचय इनसे विवाह से पूर्व का था?’ प्रश्न स्पष्ट था, अर्थात् ‘ऐसे सुदर्शन व्यक्ति को विवाह के पूर्व हृदय सौंपकर क्या आप समय रहते वापस नहीं ले पाईं?”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“इनकी तकलीफ तो बहुत पुरानी है,’ वह हँसी और उसकी अम्लान हँसी रमा को बड़ी प्यारी लगी।”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“जो दिव्यमूर्ति, प्रेयसी-रूप में किसी ताबूत में सुरक्षित शव की भाँति, उसके हृदय में ज्यों-की-त्यों धरी थी, वह किन्हीं अज्ञात विकार के कीटाणुओं के संसर्ग से सहसा क्षयग्रस्त हो, वीभत्स बन गई थी।”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“काफल के पेड़ पर पहाड़ी चिड़िया जूँहो टहूकती है, ‘जूँहो-जूँहो’ और दूसरी चिड़िया ठीक स्वर से स्वर मिलाकर उत्तर देती हैं—‘भोल, भोल, भोल,”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
“कर्त्तव्य और प्रेम के कठिन संघर्ष में कोई विरला ही प्रेम का कंटकाकीर्ण पथ चुन पाता”
― मधुयामिनी
― मधुयामिनी
