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Rahat Indori Rahat Indori > Quotes

 

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“वरना औक़ात क्या थी सायों की धूप ने हौसले बढ़ाए थे सिर्फ़ दो घूंट प्यास की ख़ातिर उम्र भर धूप में नहाए थे”
Rahat Indori, नाराज़
“किसी ने ज़हर कहा है किसी ने शहद कहा कोई समझ नहीं पाता है ज़ायका मेरा मेंचाहताहूं ग़ज़ल आसमान हो जाये मगर ज़मीन से चिपका है काफ़िया मेरा मैं पत्थरों की तरह गूंगे सामईन में था मुझेसुनातेरहेलोगवाक़ियामेरा”
Rahat Indori, नाराज़
“उससे मिलना कहाँ मुक़द्दर है और जी भी लिए तो क्या होगा राहत एक शब में हो गए हैं रईस कुछ फक़ीरों से मिल गया होगा”
Rahat Indori, दो कदम और सही
“जुगनुओं को साथ लेकर रात रोशन कीजिए रास्ता सूरज का देखा तो सहर हो जाएगी ज़िन्दगी भी काश मेरे साथ रहती उम्र भर ख़ैर अब जैसे भी होनी है बसर हो जाएगी तुम ने ख़ुद ही सर चढ़ाई थी सो अब चक्खो मज़ा मैं ना कहता था , कि दुनिया दर्द - ए - सर हो जाएगी”
Rahat Indori, नाराज़
“यही अक़ीक़4 थे शाहों के ताज की ज़ीनत जो उँगलियों में मदारी पहन के आते हैं”
Rahat Indori, दो कदम और सही

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नाराज़ नाराज़
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