Rahat Indori
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नाराज़
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दो कदम और सही
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मेरे बाद
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चाँद पागल है
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published
2012
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3 editions
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Mere Baad….
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मौजूद
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published
2015
—
3 editions
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Naraz
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रुत
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Maujood
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धूप बहुत है
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“वरना औक़ात क्या थी सायों की धूप ने हौसले बढ़ाए थे सिर्फ़ दो घूंट प्यास की ख़ातिर उम्र भर धूप में नहाए थे”
― नाराज़
― नाराज़
“किसी ने ज़हर कहा है किसी ने शहद कहा कोई समझ नहीं पाता है ज़ायका मेरा मेंचाहताहूं ग़ज़ल आसमान हो जाये मगर ज़मीन से चिपका है काफ़िया मेरा मैं पत्थरों की तरह गूंगे सामईन में था मुझेसुनातेरहेलोगवाक़ियामेरा”
― नाराज़
― नाराज़
“उससे मिलना कहाँ मुक़द्दर है और जी भी लिए तो क्या होगा राहत एक शब में हो गए हैं रईस कुछ फक़ीरों से मिल गया होगा”
― दो कदम और सही
― दो कदम और सही
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