पुलिसवाले की प्रेम कविताएँ
ये बेवजह की बातें भाई और उन दोस्तों के लिए है जो पुलिस की अच्छी लेकिन दबाव वाली ख़राब नौकरी करते हुए मुस्कुराते हुए मिलते हैं.
तुम न संवरती इस तरह
या मैंने फेर ली होती नज़रें.
फौजदारी में न फंसता दिल,
न उम्र भर को होना होता मुजरिम.
* * *
इससे तो अच्छा होता
कि होता बीट कांस्टेबल.
इश्क़ में
गिरफ्तार होने से तो
तेरे दर के फेरे देना अच्छा रहता.
* * *
एक दिल ही था मेरे पास
गश्त गश्त के खेल में चला गया.
अब जमानत को
कागजात में दिखाऊं भी तो क्या?
* * *
जब्ती के लिए
लगी सब अर्जियां नाकाम रही.
मैं मुकरता गया बयान से
कि तुमसे दिल वसूलना
न हो सका मोहब्बत में.
* * *
रोज़ मिलने के वादे से
जब मुकर ही गए हम.
धोखाधड़ी का वाद अटका ही रहा
कभी लगता था तुम आ जाओगी
कभी लगता था मैं ही चला आऊंगा.
* * *
ये कानूनन दोष ही था
नुकसान करके भरपाई न करना.
तुमने दिल तोड़ा बार-बार
और मेरी मोहब्बत इसे अपकृत्य साबित न कर सकी.
* * *
एक रोज़ तुमने कहा
जीयेंगे तेरे साथ मरेंगे तेरे साथ.
अब रहता है दिल उदास कि
यूँ अदमपता हो जाओगे ये उसने सोचा ही नहीं.
* * *
पीटी और ड्रिल बनाती है
सिपाही को मजबूत और अनुशासित
इसी उम्मीद में एड़ियाँ रगड़ डाली.
ये न सोचा था
एक दिन फौत हो जाता दिल मुजरिम
और मुकदमा खत्म.
* * *
तुमसे चोंचें लड़ाएँगे
ड्यूटी से ग़ैर हाजिर होकर डिनर को जायेंगे
और ज़िन्दगी मजे से चलती रहेगी.
दिल एक ग़ैर जमानती वारंट निकलेगा
ये सोचा ही न था.
* * *
मोहब्बत में जब ली थी
पहली जामातलाशी
दिल उछल-उछल कर बाहर आता था.
ये न सोचा था
कि तुम रसोई से आवाज़ दोगी
और मैं हुकुम हुकुम करता
मालखाना की पूर्ति करता जाऊँगा.
ज़िन्दगी बस इतनी सी रह जाएगी.
* * *
कभी कभी आता है ख़याल
कि एक अच्छा दिन भी आएगा
आमद की जगह लिखा होगा फारिग.
जाब्ता कहीं और जा रहा होगा
मैं आ रहा होऊंगा तुम्हारी बाहों की तरफ.
* * *
कभी हौसला था
मोहब्बत से शांति व्यवस्था बनाये रखेंगे.
इन दिनों हसरतों और दुखों पर
दो चार पैग का लाठी चार्ज करते हैं
और सो जाते हैं.
* * *
मैं भी सोचता हूँ काश एक पुलिसवाला हो सकता. मुझे बहुत कुछ बरामदगी करनी है. मुझे कुछ दोस्तों को मिलवाना है 'आई मिलन की बेला' लिखे पट्टों से. कुछ को एक डंडे से परिचित करवाना है जिस पर लिखा है "पिया तोसे नैना लागे रे".
मगर जाने दो. अब दिल ने माफ़ कर दिया है मगर भूल नहीं पाया है. एक रोज़ भूल भी जायेगा.
* * *
[Painting image : Vuillard_Stilleben]
तुम न संवरती इस तरह
या मैंने फेर ली होती नज़रें.
फौजदारी में न फंसता दिल,
न उम्र भर को होना होता मुजरिम.
* * *
इससे तो अच्छा होता
कि होता बीट कांस्टेबल.
इश्क़ में
गिरफ्तार होने से तो
तेरे दर के फेरे देना अच्छा रहता.
* * *
एक दिल ही था मेरे पास
गश्त गश्त के खेल में चला गया.
अब जमानत को
कागजात में दिखाऊं भी तो क्या?
* * *
जब्ती के लिए
लगी सब अर्जियां नाकाम रही.
मैं मुकरता गया बयान से
कि तुमसे दिल वसूलना
न हो सका मोहब्बत में.
* * *
रोज़ मिलने के वादे से
जब मुकर ही गए हम.
धोखाधड़ी का वाद अटका ही रहा
कभी लगता था तुम आ जाओगी
कभी लगता था मैं ही चला आऊंगा.
* * *
ये कानूनन दोष ही था
नुकसान करके भरपाई न करना.
तुमने दिल तोड़ा बार-बार
और मेरी मोहब्बत इसे अपकृत्य साबित न कर सकी.
* * *
एक रोज़ तुमने कहा
जीयेंगे तेरे साथ मरेंगे तेरे साथ.
अब रहता है दिल उदास कि
यूँ अदमपता हो जाओगे ये उसने सोचा ही नहीं.
* * *
पीटी और ड्रिल बनाती है
सिपाही को मजबूत और अनुशासित
इसी उम्मीद में एड़ियाँ रगड़ डाली.
ये न सोचा था
एक दिन फौत हो जाता दिल मुजरिम
और मुकदमा खत्म.
* * *
तुमसे चोंचें लड़ाएँगे
ड्यूटी से ग़ैर हाजिर होकर डिनर को जायेंगे
और ज़िन्दगी मजे से चलती रहेगी.
दिल एक ग़ैर जमानती वारंट निकलेगा
ये सोचा ही न था.
* * *
मोहब्बत में जब ली थी
पहली जामातलाशी
दिल उछल-उछल कर बाहर आता था.
ये न सोचा था
कि तुम रसोई से आवाज़ दोगी
और मैं हुकुम हुकुम करता
मालखाना की पूर्ति करता जाऊँगा.
ज़िन्दगी बस इतनी सी रह जाएगी.
* * *
कभी कभी आता है ख़याल
कि एक अच्छा दिन भी आएगा
आमद की जगह लिखा होगा फारिग.
जाब्ता कहीं और जा रहा होगा
मैं आ रहा होऊंगा तुम्हारी बाहों की तरफ.
* * *
कभी हौसला था
मोहब्बत से शांति व्यवस्था बनाये रखेंगे.
इन दिनों हसरतों और दुखों पर
दो चार पैग का लाठी चार्ज करते हैं
और सो जाते हैं.
* * *
मैं भी सोचता हूँ काश एक पुलिसवाला हो सकता. मुझे बहुत कुछ बरामदगी करनी है. मुझे कुछ दोस्तों को मिलवाना है 'आई मिलन की बेला' लिखे पट्टों से. कुछ को एक डंडे से परिचित करवाना है जिस पर लिखा है "पिया तोसे नैना लागे रे".
मगर जाने दो. अब दिल ने माफ़ कर दिया है मगर भूल नहीं पाया है. एक रोज़ भूल भी जायेगा.
* * *
[Painting image : Vuillard_Stilleben]
Published on February 24, 2018 08:05
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