किसी और के बारे में



धुएं से बनते बेतरतीब रास्तों पर चलते हुए भटक कर नज़र दीवार की ओर जाती थी। कभी उसके आस-पास रहते हुए भी उसकी याद आ जाती थी। कभी छाया भरे अनजान रास्ते पर मन अकेले चल पड़ता। कभी रेत के जंगल में क्षितिज पर कोई लाल रंग डूबता हुआ गाढ़ा हो जाता। इस कभी-कभी से मन सदा डरता रहा। बेचैनी को मिटाने का कोई इरेजर न बनाया जा सका। बस अक्सर यही चाहना रही कि तुम इत्ते करीब रहो कि हम एक दूजे को देख भी न सकें।
इंस्टाग्राम के फेरे में वी के एकाउंट में ये बेवजह की बात मिली. 
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Published on February 28, 2018 23:34
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Kishore Chaudhary's Blog

Kishore Chaudhary
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