इस तिलिस्म में

शैतान की प्रेमिका पूछ रही थी तुम मुझको कितना याद करते हो। ठीक उस वक़्त रेगिस्तान की सोनल घास के कान में हवा फूंक रही थी सरगोशी सुनो जानाँ, सुनो जानाँ, सुनो जानाँ। * * *

शैतान की प्रेमिका ने कहा तुमको बहुत दूर चलकर आना होगा मुझे छूने के लिए। शैतान, स्वर्ग से धकेले जाने के बाद धरती की ओर गिरते हुए बस यही तो सोच रहा था कि कहाँ जाऊंगा?* * * शैतान की प्रेमिका ने कहा ये तूफ़ान मेरे भीतर से उठता है तुम्हारे भीतर थमता हैऔर इसके इतर कुछ नहीं है। शैतान ने हवस को एक ओर रखाहवादिस से कहा चुप बैठो ऐसी बात मैं फिर कब सुनूंगा। * * * उसे किसी बात को ढकना न आया कि शैतान बहुत नंगा था। रेगिस्तान की रात में चमकते पूरे चाँद की तरह।* * * उस वक़्त रात के ढाई बजे थे। शैतान ने सोचा कि वह कब इतनी देर तक जगा था वह भी तो अब से पहले किसलिए जगी होगी। * * * तुम मारे जाओगे इस तिलिस्म में मैं बहुत अधिक हूँ शैतान की प्रेमिका ने कहा। शैतान ने महसूस किया दिल पर बर्फ गिर रही है, उसके बोसे गर्म हैं। * * * शैतान अजीर्ण हवस था शैतान की प्रेमिका मुक्ति। शुक्रिया। * * *
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Published on June 04, 2021 03:26
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Kishore Chaudhary
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