जनाब पूजा में हम हमेशा इतना फसे पड़े थे व्यापार खेल सा सूझने लगा, सूझा जब इतिहासी खिलाड़ी कसे खड़े थे तड़ीपार फेल सा बूझने लगा, मन्नत मांगा जो भी मांगा एक बेटे का मांगा तो दूजा मारना पाप कैसे हुआ, अब ढूंढो ज़रा सब लगा के जन्नत नेक पेठे का टांगा तो खरबूजा उतारना झाप कैसे हुआ।
Published on November 16, 2021 19:08